Wednesday, September 22, 2021

 

 

 

बेटियों को कोख में मारने वाले लगवा रहे है भारत माता के नारे: सईद

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नई दिल्ली.सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) ने महाराष्ट्र के एआईएमआईएम विधायक वारिस पठान के निलंबन को आश्चार्यजनक बताते हुए कहा है कि यह इतिहास में होने वाला पहला ऐसा अजब काम है जहां किसी व्यक्ति को नारा न लगाने के कारण निलंबित किया गया हो। संसद और विधानसभाएं चर्चा व बहस के लिए होती हैं, जहां नारेबाज़ी करने की मनाही है। एसडीपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ए सईद ने अपने बयान में कहा कि कोई किसी को इस ढंग से नारे लगाने के लिए ज़बरदस्ती कैसे कर सकता है? हर कोई राष्ट्रप्रेम की भावना का अपने तरीके से व्यक्त करता है। ‘भारत माता की जय‘ कहना ही सिर्फ देशभक्ति नहीं हो सकता है। बल्कि इस तरह का व्यवहार करके हम समाज को बांटने का काम कर रहे हैं।

श्री सईद ने कहा कि अंधराष्ट्रभक्ति देशभक्ति नहीं हो सकती और छुपे फासीवादी एजेंडे के तहत राष्ट्रवाद के नाम पर नाइंसाफी तो कभी नहीं। यह राज्य का मामला नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक भावना है। जबकि किसी विशेष नारे लगाने के लिए कोई भी क़ानूनी बाध्य नहीं है और ऐसा कुछ भी करना गैरक़ानूनी नहीं है। किसी भी व्यक्ति की तुलना इस बात से करना कि वह क्या कहता है और क्या करता है की जानी चाहिए नाकि वह क्या बोलता है इससे की जाए। भारत में आज भेदभावपूर्ण तरीके से शरारती तत्वों के हौसलें इतने बुलंद है कि जहां फासीवादी लोगों के बीच दबे कुचले और हाशिये पर पड़े लोग कोई आवाज़ बुलंद नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद इस लिए चुनकर नहीं भेजे जाते हैं कि वह विधानसभा या संसद में नारे लगायें या किसी की जय बोलें। क्या वारिस पठान ने जय महाराष्ट्र या जय भारत कहने से मना किया? क्या आप किसी को किसी (चाहे देश के लिए ही) उसकी मां या पिता या दूसरा रिश्तेदार बताने के लिए विधायिका में बाध्य किया जा सकता है? क्या यह संवैधानिक है? अदालत को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। पठान को एक बार कोर्ट में ज़रूर जाना चाहिए, उनका निलंबन मौलिक स्वतंत्रता का हनन है जबकि उन्होंने कोई गैरक़ानूनी काम नहीं किया है। बल्कि आरएसएस ने एक और मुद्दा खड़ा कर दिया है ताकि विपक्ष पर राजनैतिक हथियार की तरह प्रयोग कर सके।
श्री सईद ने कहा कि जेरेमी बर्नाड कर्बिन जो कि ब्रिटिश संसद में विपक्ष के नेता थे, उन्होंने कभी राष्ट्रगान नहीं गाया, क्योंकि यह रानी की वंदना करता था। जिनका मानना था कि राजशाही एक कालभ्रम है। वो ब्रिटिश राष्ट्रगान के समय चुप रहते थे जबकि दूसरे नेता उसे गाते थे। वह इस बात के लिए उन्हें अखबारों में आलोचना भी झेलनी पड़ती लेकिन वह खामोश ही रहते थे।
उन्होंने कहा कि अमेरिक, यूरोपियन, सिंगापुर वासी या कोई भी विकसित देश के लोग कभी भी ‘अमेरिकन माता की जय‘, फ्रांस माता की जय‘ इस तरह के नारे नहीं लगाते लेकिन फिर भी बेहद विकसित और बेहद उच्च जीवन व्यतीत करते हैं। यह सिर्फ इसलिए क्योंकि वह सोच समझकर और सभ्य व्यवहार करते हैं। सिर्फ नारे लगाने से कुछ नहीं होगा बल्कि देश में शिष्टाचार से देश का विकास मुमकिन है।
श्री सईद ने कहा कि आरएसएस एक चाल खेल रही है और भाजपा उसके मार्गदर्शन पर चल रही है। जोकि हमेशा समाज को बांटने की नीति पर काम करती है जहां पहले ब्राहमण और दलित, फिर हिन्दु-मुस्लिम और अब देशभक्त और देशद्रोही जबकि भाजपा कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन बनाकर सरकार चला रही है जोकि कश्मीर को अलग करने की पक्षधर है। उन्होंने इसे आश्चर्यजनक बताते हुए कहा कि बुरे लोग देश में भारत माता की बेटियों को कोख में ही मार रहे हैं और भारत माता के लालों को मारते हैं साथ ही लोगों को जिंदा जलाते हैं, वह आज अपनी काली करतूतों पर परदा डालने के लिए भारत माता के नारे लगाने के लिए ज़बरदस्ती कर रहे हैं, जिसने भारत माता की आत्मा को भी ठेस पहुंचायी है। (हस्तक्षेप)

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