Monday, September 27, 2021

 

 

 

2000 से ज्यादा मुस्लिमों ने किया TMC से किनारा, आरोप – सिर्फ लेना जानती है वोट

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मुस्लिमों के एक तरफा वोट के दम पर शासन कर रही ममता बनर्जी के राज में मुस्लिमों की हालत खस्ताहाल है। राज्य में मुस्लिम समुदाय शिक्षा, रोजगार, सरकारी नौकरियों, स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि में पिछड़ ही जा रहा है। ऐसे में अब मुस्लिमों ने भी ममता से किनारा करना शुरू कर दिया है।

पश्चिम बंगाल में 2000 से ज्यादा मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने टीएमसी का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। सियासी तौर पर इसे ममता बनर्जी के लिए झटका माना जा रहा है। बता दें कि
राज्य में केवल मुस्लिम समुदाय के लोगों का वोट शेयर 27 फीसदी है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दीनाजपुर जिले में मुस्लिम बहुल वोट्स ज्यादा हैं।

ममता बनर्जी की पार्टी से निकलने के बाद शकील अंसारी ने टाइम्स नाउ को बताया कि टीएमसी में लोकतंत्र नहीं रह गया है। उन्होने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ बैठक की है और कहा है कि वे टीएमसी के समर्थन के बिना 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं।

टीएमसी से इस्तीफा देने वाले मुस्लिम कार्यकर्ताओं का कहना है कि ममता बनर्जी सरकार बीजेपी का डर दिखाकर चुनावी अभियान का ध्रूवीकरण कर रही है। मौजूद पश्चिम बंगाल सरकार मुसलमानों के हित की बात तो करती है। लेकिन सच ये है कि जमीन पर सच्चर कमेटी को लागू करने की दिशा में कदम नहीं उठाया गया।

इसके साथ ही 10 हजार मदरसों को राजकीय मान्यता देने की घोषणा की गई। ये बात अलग है कि जमीन पर मुसलमानों के लिए कहीं कुछ नहीं दिखता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाल ही में दुर्गा पांडालों के लिए जिस तरह से अनुदान देने की घोषणा की गई उससे साफ है कि ममता बनर्जी सरकार खुद सांप्रदायिक राजनीति में भरोसा करती है।

टीएमसी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ममता बनर्जी एक तरह से बीजेपी का चोरी चोरी साथ दे रही हैं। पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी है। मौजूदा टीएमसी सरकार का दोहरा व्यवहार सामने नजर आ रहा है।

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