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ऑल इंडिया मजलिस ए इतेहादुल मुसलिमीन के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम समुदाय को राजपूत समुदाय से सीखने की नसीहत देते हुए कहा कि 4 फीसदी राजपूत एकजुट होकर पद्मावत की रिलीज के खिलाफ लड़ रहे है. लेकिन 14 फीसदी मुसलमान शरीयत को लेकर एकजुट नहीं हो सकते.

न्यूज 18 के मुताबिक ओवैसी ने कहा, “जब फिल्म में रानी पद्मावती पर कुछ गलत दिखाया गया तो 4 फीसदी राजपूत फिल्म के खिलाफ उठ खड़े हुए और कहने लगे थिएटर जला दूंगा, एक्टर की नाक काट लूंगा, फिल्म डायरेक्टर का सिर धड़ से अलग कर दूंगा लेकिन सिनेमा रिलीज होने नहीं दूंगा. वे लोग मात्र चार फीसदी हैं लेकिन उन्होंने अपनी आवाज सही तरीके से सभी जगह पहुंचा दी मगर हम लोग असहाय बने हुए हैं.”

ओवैसी ने मुस्लिम समुदाय के सामने सवाल उठाते हुए कहा कि राजपूतों ने मुसलमानों को आइना दिखा दिया है. उन्होंने कहा कि अभी भी उनका संघर्ष जारी है. वो फिल्म रिलीज नहीं होने देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन शरीयत को बचाने के लिए हम लोग क्या कर रहे हैं?

तीन तलाक के मुद्दें पर ओवैसी ने कहा, ‘तीन तलाक विधेयक मुस्लिम समुदाय के खिलाफ एक साजिश है. यह समुदाय की महिलाओं को सड़कों पर लाने और पुरुषों को जेल भेजने की एक चाल है.’ हालांकि, ओवैसी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को उन लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए जो तलाक के लिए तीन तलाक का सहारा लेते हैं.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए कुछ नहीं कर रहे लेकिन दूसरों द्वारा किए जाने वाले अच्छे काम का श्रेय लेने में हमेशा आगे रहते हैं. बीजेपी मुस्लिम मुक्त भारत चाहती है और ऐसा होगा नहीं.’  उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार वी डी सावरकर की विचारधारा थोपने की कोशिश कर रही है. एम एस गोवलकर, के बी हेडगेवार और सावरकर हिंदुत्व विचारधारा के थे और हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे.’

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