क्या है MSP से जुडी किसानो की मांग और क्यों बन गई सरकार की कमज़ोर नब्ज़- जाने

पुरे भारत में इस समय चर्चा का विषय है की केंद्र सरकार ने कृषि कानून के तीनो बिल को वापस लेना का एलान कर दिया है लेकिन फिर भी किसान अपने घर वापस जाने को तैयार नहीं है किसान सरकार से MSP पर क्या बात करने की मांग कर रहा है और ये MSP सरकार के लिए क्यों परेशानी का सबब बानी हुई है, आइये जानते है – केंद्र सरकार ने कृषि कानून के तीनो विवा’दित बिल यह सोच कर वापस लेने का एलान किया था की किसान आंदो’लन छोड़कर अपने घर चला जायेगा परन्तु ऐसा होता दिख नहीं रहा है।

आंदो’लन छोड़कर न जाने का कारण किसानो ने बताया है, की कर्षि कानून की सिर्फ एक मांग नहीं बल्कि अभी कई और मांग है जिनमे से MSP भी एक बड़ा मुद्दा है। किसानो का कहना है की MSP को सरकार कानूनी तोर पर देश में लागु करे। नवभारत में प्रकाशित खबर के अनुसार किसानो का कहना है की यदि एक बार आंदो’लन ख़तम हुआ तो दुबारा इस स्तर पर नहीं हो पाएगा जोभी मांग है जब तक पूरी नहीं हो तब तक आंदो’लन ख़तम नहीं होगा।

MSP क्या है – MSP सभी किसानो के लिए एक गारंटी होती है जोकि सरकार दुवारा किसी भी फसल पर मूल्य निर्धारित कर के लगाई जाती है अर्थार्त इसमें सरकार जो रेट तय करेगी किसान उससे कम पर फसल नहीं भेचेगा तो इस कंडीशन में सरकार को वो अनाज खरीदना पड़ेगा। हालांकि देश के कम किसानो को इसका कम लाभ होता है। MSP को लेकर किसानो की मान को जटिल मन जा रहा है। 23 फसलों पर सरकार आज के समय में मस्प दे रही है। MSP के मसले पर कृषि विशेषज्ञ और अर्थशस्त्रियो के बीच आमराय आसानी से नहीं बन पाती है।

इस कुछ की रॉय है MSP पर अगर कानून बनता है तो उसका लाभ छोटे किसानो को मिलेगा, वही कुछ का कहना है ऐसा नहीं है और यह कहने वालो की संख्या ज़्यादा है। MSP पर कानून बना देना सरकार के लिए आसान नहीं है परन्तु जिन 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव है उन सबमे किसानो की एक बड़ी भूमिका है। इनमे UP,
पंजाब, और उत्तराखंड में किसानो की संख्या सबसे ज़्यादा है। रिपोर्ट में मुताबिक किसान UP में 210 सीटों पर अपना प्रभाव रखते है। ये एक बड़ा कारण है जिससे सरकार कमज़ोर पड़ रही है।

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