UP News: शिया वक्फ़ बोर्ड से वसीम रिज़वी का वर्चस्व खत्म, अली ज़ैदी बने चेयरमैन

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ़ बोर्ड में 15 साल से काबिज़ वसीम रिज़वी का वर्चस्व आखिरकार खत्म हो गया है। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद का चुनाव सोमवार को था। वसीम रिजवी ने चुनाव का बहिष्कार कर दिया जिसके चलते मौलाना कल्बे जव्वाद के दामाद अली जैदी निर्विरोध चुने गए। बोर्ड के चुनाव में अली ज़ैदी को नया चैयरमैन चुना गया है।

शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और मोहसिन रज़ा के नजदीकी ज़ैदी प्रदेश सरकार की तरफ से बोर्ड के नामित सदस्य थे। चेयरमैन बनते ही ज़ैदी ने बोर्ड से भ्रष्टाचार मिटाने, वक्फ़ माफिया और लैंड माफिया से बोर्ड की जमीने छुड़ाने और बोर्ड की ज़मीनों व आमदनी के लाभ लोगों तक पहुंचाने का वादा किया है। वसीम रिजवी खुद लड़ने की बजाय अपने करीबी सैय्यद फैजी को लड़ाना चाहते थे, पर सरकार की ओर से मनोनीत सदस्यों में सभी कल्बे जव्वाद के करीबी थे।

वसीम रिज़वी को इस चुनाव में करारा झटका लगा है। समाजवादी पार्टी हो या बहुजन समाज पार्टी, वसीम के लिए चेयरमैन पद पर बने रहना बड़ा आसान था लेकिन बीजेपी सरकार के आते ही उनकी मुश्किलें शुरू हो गईं लेकिन उन्हें भारतीय जनता पार्टी का करीबी माना जाता था लेकिन बीते कुछ महीनों में कुरान और पैगंबर हजरत मोहम्मद पर की गई विवादित टिप्पणियों की वजह से मुस्लिम समाज उनसे खासा नाराज था। यही वजह थी कि वसीम रिज़वी का कोई समर्थन नहीं कर रहा था और वह अलग-थलग पड़ गए और उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

वसीम रिज़वी ने करारी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश शिया वक्फ़ बोर्ड पर अफगानिस्तान की तरह तालिबान का कब्जा हो चुका है। ईरानी एजेंट कल्बे जव्वाद का दामाद बोर्ड का अध्यक्ष चुना जा चुका है जिन्हें हुकूमत द्वारा नामित किया था और नामित सदस्यों ने ही उन्हें अध्यक्ष बना लिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय के अंतिम फैसले का हम इंतजार करेंगे। वसीम ने अपने बयान में कहा कि वह और सैयद फैजी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के निर्वाचित सदस्य हैं। दोनों ने नामित किए गए शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सदस्यों के विरोध में माननीय उच्च न्यायालय में वाद दाखिल किया है।

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