Saturday, November 27, 2021

कृषि बिल वापसी पर लालू और दोनों बेटों का केंद्र पर वार कहा थूक कर चाटना इसे कहते है

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जैसे ही सरकार ने कृषि बिल वापस लिया है तब से पूरे सोशल मीडिया में नेताओ ने अपने अपने व्यूज रखे है कोई कुछ कह रहा है तो कोई कुछ इसी बीच कृषि बिल वापस लेने के बाद केंद्र सरकार पर विरोधियों का हमला भी जारी है। जाहिर है कि बिहार में इसको लेकर सियासत होगी ही होगी और अब इसी कड़ी में RJD सुप्रीमो लालू यादव ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है।

लालू यादव ने कहा कि देश की जनता सब समझ रही है कि ये सब वोट लेने के लिए किया जा रहा है, आने वाले चुनाव में सभी जनता इनके खिलाफ वोट देगी। इसके साथ ही केंद्र की मोदी सरकार पर लालू यादव के दोनों बेटों तेज प्रताप यादव और तेजस्वी ने भी तीखे हमले बोले हैं।

वही लालू यादव के बड़े बेटे और फिलहाल RJD में ही अलग-थलग पड़े तेज प्रताप यादव ने कृषि बिल वापस लेने के बाद केंद्र पर ट्टीट करके हमला बोला है। तेज प्रताप ने यादव ने ट्वीट किया है कि ‘थूक कर चाटना इसी को कहते हैं, अहंकार की हार इसी को कहते हैं..! किसान एकता जिन्दाबाद। बेरोजगारी, भुखमरी, महंगाई और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी और हमारी एकता जीतती रहेगी। जय हिन्द, वन्दे मातरम्।

इसके साथ ही तेजस्वी यादव ने भी मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी ने इसे तीन राज्यों में चुनाव से पहले हार का डर करार दिया है और तेजस्वी ने ट्वीट किया है कि ‘एकता में शक्ति है। यह सबों की सामूहिक जीत है। बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी। उप चुनाव हारे तो उन्होंने पेट्रोल-डीजल पर दिखावटी ही सही लेकिन थोड़ा सा टैक्स कम किया। UP,उत्तराखंड,पंजाब की हार के डर से तीनों काले कृषि कानून वापस लेने पड़ रहे है।

लालू यादव ने भी मोदी सरकार पर हमला करते हुए एक के बाद एक दो ट्वीट किए उन्होंने पहले में लिखा कि ‘विश्व के सबसे लंबे,शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक किसान सत्याग्रह के सफल होने पर बधाई। पूंजीपरस्त सरकार व उसके मंत्रियों ने किसानों को आतंकवादी, खालिस्तानी, आढ़तिए, मुट्ठीभर लोग, देशद्रोही इत्यादि कहकर देश की एकता और सौहार्द को खंड-खंड कर बहुसंख्यक श्रमशील आबादी में एक अविश्वास पैदा किया।

इसी ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए लालू ने आगे लिखा कि ‘देश संयम, शालीनता और सहिष्णुता के साथ-साथ विवेकपूर्ण, लोकतांत्रिक और समावेशी निर्णयों से चलता है ना कि पहलवानी से! बहुमत में अहंकार नहीं बल्कि विनम्रता होनी चाहिए।

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