लखनऊ | उत्तर प्रदेश चुनावो में प्रधानमंत्री मोदी ने किसानो के कर्ज माफ़ करने का वादा किया था. उन्होंने कहा था की सरकार गठन के बाद होने वाली पहली कैबिनेट मीटिंग में सभी सीमान्त और लघु किसानो का कर्ज माफ़ कर दिया जाएगा. 19 मार्च को उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. तब से ही प्रदेश के सभी किसान पहली कैबिनेट मीटिंग का इन्तजार कर रहे थे.

आज शाम 5 बजे सरकार की कैबिनेट बैठक शुरू हुई. इस मीटिंग में कई अहम् फैसले लिए गए. करीब डेढ़ घंटे चली बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा और सिद्धार्थ नाथ सिंह ने प्रेस को संबोधित कर बैठक के फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने बताया की प्रदेश के सभी सीमान्त और लघु किसानो का 1 लाख रुपये तक का ऋण माफ़ करने का फैसला किया है.

ऋण माफ़ी के बारे में बताते हुए सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा की प्रदेश में कुल 2.30 करोड़ किसान है. इनमे से 2.15 करोड़ सीमान्त और लघु किसान है. कैबिनेट मीटिंग में फैसला लिया गया की 2016-17 वित्त वर्ष में जिन सीमान्त और लघु किसानो ने जिस भी बैंक से फसली ऋण लिया है, उनका एक लाख तक का ऋण माफ़ कर दिया गया. सरकार के फैसले से राजस्व पर करीब 36 हजार करोड़ का बोझ पड़ेगा.

सरकार ने 2.15 करोड़ किसानो का 30729 करोड़ रूपए ऋण माफ़ किया है. इसके अलावा 7 लाख किसानो का वो ऋण जो एनपीए बन गया था वो पूरी तरह माफ़ कर दिया गया है. यह राशी 5630 करोड़ रूपए है. दोनों राशी को मिलाने पर सरकार ने 36359 करोड़ रूपए माफ़ किये है. इसके अलावा योगी कैबिनेट ने आगामी गेहू खरीद के लिए 7 हजार नए खरीद केंद्र बनाने का फैसला किया है.

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