नई दिल्ली | देश में सरकारी स्कूलों की बदतर हालात की वजह से प्राइवेट स्कूलों की चांदी हो रही है. प्राइवेट स्कूल, मनमाने तरीके से फीस बढाते है और परिजन चाहकर भी कुछ नही कर पाते. फीस के अलावा ज्यादातर स्कूलों ने खुद ही ड्रेस से लेकर किताबे तक बांटनी शुरू कर दी है. इन चीजो के भी वो मनमाने दाम वसूलते है. देश की राजधानी दिल्ली में हर साल नर्सरी एडमिशन को लेकर हो हल्ला मचना शुरू हो जाता है.

दिल्ली के प्राइवेट स्कूल , नर्सरी में एडमिशन के लिए भारी भरकम डोनेशन वसूलते है. बेलगाम हो चुके इन प्राइवेट संस्थानों के ऊपर कोई भी रेगुलेटरी अथॉरिटी नही है जो इन पर लगाम लगा सके. दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने जरुर इन प्राइवेट स्कूलों के पर कुतरने की कोशिश की है. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया पहले ही कह चुके है की अगर प्राइवेट स्कूलों को व्यापर करना है तो शिक्षा क्षेत्र छोड़कर गाजर बेचना शुरू कर दे. लेकिन हम शिक्षा को व्यापार नही बनने देंगे.

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दिल्ली सरकार ने डीडीए की जमीन पर चल रहे प्राइवेट स्कूलों को बिना सरकार की अनुमति के फीस बढाने को लेकर रोक लगाई हुई है. इसके अलावा सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूलों से मैनेजमेंट कोटा खत्म करने का भी आदेश दिया है. सरकार के आदेश के खिलाफ प्राइवेट स्कूल पहले हाई कोर्ट का रुख कर चुके है जहाँ से उनको निराशा ही हाथ लगी. अब हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मोहर लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने आज एक एतिहासिक फैसला देते हुए कहा की सरकारी जमीन पर जो भी प्राइवेट स्कूल चल रहे है उनको बिना सरकार की मर्जी के फीस बढाने की इजाजत नही है. फ़िलहाल दिल्ली में 400 से ज्यादा स्कूल डीडीए की जमीन पर चल रहे है. हालाँकि प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है. प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रेजिडेंट एस. के. भट्टाचार्य ने कहा की इस फैसले में कई कमिया है. डीएसईएआर 1973 के आर्टिकल 17 सी के मुताबिक , प्राइवेट स्कूल को फीस तय करने का अधिकार मिला हुआ है.

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