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गांधीनगर | मोदी सरकार के नोट बंदी फैसले के बाद , आरबीआई ने नकद निकासी की सीमा तय कर दी थी. फ़िलहाल कोई भी व्यक्ति अपने खाते से 24 हजार रूपए प्रति हफ्ता और एटीएम से 2500 रूपए रोज निकाल सकता है. इसके अलावा आरबीआई ने जिला सहकारी बैंकों से नकदी निकालने पर रोक लगाई हुई है. अब कोर्ट आरबीआई से पूछ रहा है की आपने किस नियम के तहत कैश निकासी पर सीमा लगायी है.

गुजरात हाई कोर्ट में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालंत ने आरबीआई से पुछा है की आप किस नियम के आधार पर जिला सहकारी बैंकों में निकासी पर रोक लगा रहे है और कौन सा नियम किसी भी व्यक्ति को अपने ही पैसे निकालने से रोकता है. याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस आर एस रेड्डी और जस्टिस वीएम् पंचोली ने आरबीआई से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया.

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कोर्ट ने कहा की आरबीआई के पास नोट बैन करने का अधिकार है. आप अपने इसी अधिकार का इस्तेमाल कर रहे है लेकिन आपको नोटों की निकासी की सीमा तय करने का अधिकार कैसे मिला? कोर्ट ने आरबीआई से यह भी पुछा की आपने किन अधिकारों के तहत जिला सहकारी बैंकों में नकदी निकासी पर पाबंदी लगायी है. मालूम हो की आरबीआई ने 14 नवम्बर को एक सर्कुलर जारी कर जिला सहकारी बैंकों से नकदी निकासी की सीमा तय कर दी थी.

इसी को चुनौती देते हुए भावनगर जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन नानूभाई वाघानी ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका डाली थी. इस याचिका में नानूभाई ने सवाल किया की आरबीआई एक्ट और बैंकिंग नियामक कानूनों में कही पर भी आरबीआई को नकदी निकासी की सीमा तय करने का अधिकार नही है. ऐसे में आरबीआई ने यह फैसला किस आधार पर लिया?

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