Thursday, January 27, 2022

जब किडनैपिंग के डर से चलते ऑटो से कूद गई युवती बोली “सोचा हड्डियां टूट जाना बेहतर होगा”

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गुरुग्राम की रहने वाली एक महिला ने ट्विटर पर एक ट्वीट लिखा जिसमें उसने एक ऑटो रिक्शा ड्राइवर द्वारा उसे कथित रूप से अगवा करने की कोशिश का जिक्र किया। इस युवती का कहना है कि बचने के लिए उसे चलते ऑटो रिक्शा से कूदना पड़ा।

इस महिला के ट्वीट के अनुसार यह घटना गुड़गांव के सेक्टर 22 में हुई जो कि उसके घर से सिर्फ 7 मिनट दूरी पर है। महिला की ट्विटर प्रोफाइल के अनुसार उसका नाम निष्ठा है और वह वह एक कम्युनिकेशन स्पेशलिस्ट के तौर पर काम करती है।

महिला का कहना है कि ऑटो ड्राइवर ने जानबूझकर गलत मोड़ पर मोड़ दिया और अनजानी सड़क पर ऑटो चलाता रहा। जिसके बाद महिला ने विरोध किया पर ऑटो ड्राइवर ने कोई भी उसको जवाब नहीं दिया।

निष्ठा ने अपने ट्वीट करते हुए कहा कि,”कल का दिन मेरी ज़िन्दगी के सबसे डरावने दिनों में से एक था, क्योंकि मुझे लगता है, मुझे लगभग अगवा कर लिया गया था, मैं नहीं जानती, वह क्या था, लेकिन अब भी मेरे रोंगटे खड़े हो रहे हैं। दोपहर को लगभग 12:30 बजे, मैंने घर जाने के लिए (गुड़गाव के) सेक्टर 22 के व्यस्त बाज़ार से एक ऑटो लिया, जो मेरे घर से लगभग सात मिनट की दूरी पर है।”

आगे लिखा, “मैंने ऑटोरिक्शा ड्राइवर से कहा कि मैं उसका भुगतान PayTM से करूंगी, क्योंकि मेरे पास Cash नहीं थी, और देखने से लग रहा था कि वह उबर के लिए ऑटो चलाता था। मुझे लगा कि वह इससे संतुष्ट रहेगा, वह मान गया और मैं ऑटो में बैठ गई, वह अच्छी-खासी आवाज़ में भजन सुन रहा था।”

निष्ठा ने अगले लिखा, “हम एक टी-प्वाइंट पर पहुंचे, जहां से मेरे घर वाले सेक्टर के लिए दाएं मुड़ना था, लेकिन वह बाएं मुड़ गया। मैंने उससे पूछा कि आप बाएं क्यों मुड़ रहे हो, उसने नहीं सुना, और वह ज़ोर-ज़ोर से ऊपर वाले (मैं धर्म का ज़िक्र नहीं करना चाहती, क्योंकि यह किसी धर्म से जुड़ा नहीं है) का नाम लेने लगा।”

युवती ने आगे लिखा, “मैं सचमुच चीखी – ‘भैया, मेरा सेक्टर राइट (दाएं) में था, आप लेफ्ट (बाएं) में क्यों लेकर जा रहे हो।’ उसने जवाब नहीं दिया और काफी ऊंची आवाज़ में ऊपर वाले का नाम लेता रहा। मैंने उसके बाएं कंधे पर 8-10 बार मारा भी, लेकिन कुछ नहीं हुआ, उस वक्त मेरे दिमाग में सिर्फ एक खयाल आया – बाहर कूद जाओ। स्पीड 35-40 (क्लोमीटर प्रति घंटा) थी, और इससे पहले कि वह स्पीड को बढ़ाता, मेरे पास बाहर कूद जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। मैंने सोचा, गायब हो जाने से हड्डियों का टूट जाना बेहतर रहेगा और मैं चलते हुए ऑटो से बाहर कूद गई। मैं नहीं जानती, इतनी हिम्मत मेरे भीतर कहां से आ गई।”

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