नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल कर सबको चौंका दिया वही पंजाब में पहली बार किस्मत आजमा रही आम आदमी पार्टी भी कांग्रेस की जीत के बाद हैरान परेशान नजर आई. तीनो प्रदेशो में अप्रत्याशित परिणाम मिलने पर विपक्ष ने हार का पूरा ठीकरा ईवीएम पर थोप दिया. मायावती से लेकर अरविन्द केजरीवाल तक ने अपनी अपनी हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार बताया.

सबसे पहले मायावती ने इस मामले को उठाते हुए कहा की बीजेपी ने बेईमानी करके यह जीत हासिल की है. इसके बाद उन्होंने हर महीने की 11 तारीख को काला दिवस मनाने और मामले को कोर्ट में ले जाने की बात कही थी. मायावती से पहले ही एक समाजसेवी एम्एल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल, ईवीएम् मशीन पर रोक लगाने की मांग की है.

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याचिकर्ता का कहना है की चुनावो में ईवीएम् के इस्तेमाल से धांधली हो रही है जिसका फायदा कुछ राजनितिक पार्टियों को मिल रहा है इसलिए ईवीएम् मशीन का चुनावो में इस्तेमाल बंद होना चाहिए. एम्एल शर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने को तैयार हो गया है. देश की सर्वोच्च अदालत 24 मार्च को इस मामले में सुनवाई करेगा.

मालूम हो की बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी पहले ही ईवीएम् मशीन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके है. उस समय कोर्ट ने आदेश दिया था की ईवीएम् मशीनो में वोट डालने के बाद पर्ची निकलने की व्यवस्था की जाए जिससे मतदाता को भरोसा हो सके की उसने जिस पार्टी को मतदान किया है , उसका वोट उसी पार्टी को मिला है. कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था की मतदान के पश्चात निकलने वाली पर्ची को संभल के रखा जाए. अगर बाद में सवाल उठाये जाते है तो पर्चियों की गिनती कर मामले का निपटारा किया जा सके.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद चुनाव आयोग ने कुछ ही बूथों पर इस तरह की व्यवस्था की थी. इसलिए अरविन्द केजरीवाल ने चुनाव आयोग से गुहार लगाई की जिन भी जगहों पर पर्ची व्यवस्था की गयी थी वहां पर्चियों और ईवीएम् मशीन का मिलान कर सभी आशंकाओ को खत्म किया जाए. लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी यह मांग ठुकरा दी.

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