नई दिल्ली | बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवानी , केन्द्रीय मंत्री उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी समेत 13 आरोपियों पर अपराधिक साजिश रचने का मामला चलाने का आदेश दिया. इसके अलावा कोर्ट ने सीबीआई की उस अर्जी को भी स्वीकार कर लिया जिसमे रायबरेली में चल रहे मुक़दमे को लखनऊ बेंच में ट्रान्सफर करने की मांग की गयी थी.

बुधवार को सीबीआई की याचिका पर अपना फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा की वो आडवानी समेत 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ अपराधिक साजिश का मामला चलाने की सीबीआई की मांग को स्वीकार करते है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उमा भारती और लाल कृष्ण आडवाणी पर नैतिक तौर पर अपने पद से इस्तीफा देने का दबाव बन सकता है.

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चूँकि कल्याण सिंह फ़िलहाल राजस्थान के राज्यपाल है इसलिए उनके खिलाफ मुकदमा नही चलाया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबसे बड़ा झटका लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को लगा है क्योकि दोनों ही राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार माने जा रहे थे. इसके अलावा कोर्ट ने इस मामले में दो अलग अलग चल रहे मुकदमो को भी एक जगह क्लब करने पर अपनी सहमती जता दी.

दरअसल बाबरी विध्वंस मामले में दो केस दर्ज किये गए थे. एक केस (197) कारसेवको जबकि दूसरा (198) मंच पर मौजूद नेताओ के खिलाफ दर्ज किया गया. केस 197 को हाई कोर्ट के आदेश के बाद लखनऊ की दो स्पेशल कोर्ट में चलाया गया जबकि केस 198 को रायबरेली में चलाये जाने का फैसला हुआ. केस 197 मामले की जांच सीबीआई जबकि 198 की जांच यूपी सीआईडी को सौपी गयी.

लेकिन रायबरेली में नेताओं पर चल रहे मुक़दमे में धारा 120बी (अपराधिक साजिश रचने) को शामिल नही किया गया. जिसको बाद में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद जोड़ा गया. लेकिन सुनवाई के दौरान रायबरेली कोर्ट ने अपराधिक साजिश रचने की धारा को हटा दिया. जिसको हाई कोर्ट में चुनौती दी गयी. 20 मई 2010 को इलाहबाद हाई कोर्ट ने रायबरेली अदालत के फैसले को बरकरार रखा. 2011 में सीबीआई ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

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