इंदौर | आरटीआई एक्टिविस्ट शेहला मसूद की हत्या के आरोप में सीबीआई की विशेष अदालत ने चार लोगो को उम्र कैद की सजा सुनाई है. इसके अलावा एक आरोपी को बरी कर दिया गया है. 6 साल पहले भोपाल में हुई शेहला मसूद की हत्या के यह मामला सीबीआई के हवाले कर दिया गया था. करीब 137 तारीखों पर सुनवाई करने के बाद आज सीबीआई ने अपना फैसला सुना दिया.

अदालत ने अपने फैसले में जाहिदा परवेज, सबा फारुकी, शाकिब डेंजर और शूटर ताबिश को उम्र कैद की सजा सुनाई. वही एक अन्य दोषी इरफ़ान को , अपना जुर्म कबूलने और जांच में मदद करने की एवज में रिहा कर दिया गया. सीबीआई ने इस मामले में करीब 83 गवाह पेश किये. दोषी करार देने पर जाहिदा परवेज ने कहा की अदालत ने बिना किसी सबूत मुझे दोषी ठहराया है. अदालत ने सीबीआई के दबाव में आकर अपना फैसला दिया.

मालूम हो की 16 अगस्त 2011 को मशहूर आरटीआई एक्टिविस्ट शेहला मसूद की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. शेहला जैसे ही घर से ऑफिस जाने के लिए अपनी गाडी में बैठी , तभी दो शूटर ने उन पर गोली चला दी. एक गोली शेहला की कनपट्टी पर जाकर लगी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी. करीब 6 महीने जांच करने के बाद जब पुलिस के हाथ कुछ नही लगा तो उन्होंने यह केस सीबीआई को सौपने का फैसला किया.

सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार मामले की मुख्य आरोपी जाहिदा परवेज ने सबा फारुकी के साथ मिलकर शेहला की हत्या करवाई. इसके लिए जाहिदा ने क्रिमिनल शाकिब डेंजर की मदद ली. शाकिब ने ही जाहिदा को इरफ़ान और शूटर ताबिश से मिलवाया. इसके अलावा शाकिब ने इरफ़ान को एक देसी कट्टा और पल्सर मोटरसाइकिल भी मुहैया कराई. जांच में यह भी पाया गया की इरफ़ान और ताबिश ने 14 अगस्त को भी शेहला की हत्या करने की कोशिश की थी लेकिन उन्हें बिना गोली चलाये वापिस आना पड़ा.

दरअसल जाहिदा परवेज, पूर्व विधायक ध्रुवनारायण सिंह से प्यार करती थी. वही शेहला मसूद भी ध्रुवनारायण सिंह के काफी नजदीक थी. जाहिदा को यह बिलकुल भी पसंद नही था. जाहिदा ने ध्रुव को कई बार शेहला से अलग होने के लिए कहा लेकिन जब वो नही माने तो जाहिदा ने शेहला को ही रास्ते से हटाने का फैसला किया.


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