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कोलकाता | नोट बंदी के बाद पूरा देश पुराने 500 और 1000 के नोटों को ठिकाने लगाने में लगा हुआ है. नोट बंदी के कुछ दिन बाद तक यह पुराने नोट बैंकों में बदले गए जबकि बाद में इस पर रोक लगा दी गयी. फ़िलहाल पुराने नोट केवल बैंक में जमा किये जा रहे है. यह भी केवल 30 दिसम्बर तक ही जमा होंगे. वही कुछ लोग ऐसे है जिनके पास बेहिसाब पुराने नोट है, वो परेशान है की इनको कैसे ठिकाने लगाया जाए.

कालाधन रखने वाले हर तिकड़म भिड़ा रहे है जिससे उनके पुराने पैसे नये पैसे से बदले जा सके. यहाँ तक की लोगो ने 1000 के 800 और 500 की जगह 400 रूपए में पुराने नोट बदलवाए. लेकिन अगर कोई कहे की पुराने नोट किसी बाजार में खरीदे जा रहे है और वो भी ऊँचे रेट पर तो आप कहेंगे की ऐसा कौन पागल है जो नोट बंदी के बाद इन नोटों को खरीद रहा है.

जी हां, यह खबर बिलकुल सच है. कोलकाता के बड़े बाजार में पुराने नोट ऊँचे दाम में खरीदे जा रहे है. मिली जानकारी के अनुसार यहाँ कुछ कंपनी पुराने नोट को ज्यादा कीमत देकर खरीद रहे है. यहाँ 500 के बदले 550 और 1000 के बदले 1100 रूपए दिए जा रहे है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर अनुसार यहाँ तीन लोग नए नोटों के साथ देखे गए.

ये लोग पहले पुराने नोट को कम कीमत में लेने का कारोबार कर रहे थे और अब पुराने नोटों को बेचकर नए नोट कमाने का. दरअसल इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय शेल (छदम) कंपनी कुछ पैसा ‘कैश इन हैण्ड’ में दिखाती है. यह वो पैसा ही जो खर्चे के लिए अलग रखा जाता है और बैंक में जमा नही होता. खबर मिली है की ज्यादातर कंपनियों ने अपनी बैलेंस शीट में बहुत ज्यादा ‘कैश इन हैण्ड’ दिखाया था.

नोट बंदी के बाद पुराने नोट अवैध हो गए जबकि इन कंपनियों के पास ज्यादा मात्रा में कैश उपलब्ध नही था. बैलेंस शीट में ज्यादा ‘कैश इन हैण्ड’ दिखाने के बाद इनको अपना हिसाब दुरुस्त करने के लिए और कैश की जरूरत थी. माना जा रहा है ये कंपनिया अपनी बैलेंस शीट को दुरुस्त करने के लिए पुराने नोट खरीद रही है. हालाँकि कुछ अर्थशास्त्री इससे इत्तेफाक नही रखते. उनका कहना है की इस मामले में कुछ और ही खेल खेला जा रहा है.


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