चित्तोडगढ | फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट कर चर्चा में आई करणी सेना, एक बार फिर विवादों में घिर गयी है. दरअसल रविवार को करणी सेना के कुछ सदस्यों ने चित्तोडगढ के पद्मनी महल में घुस कर तोड़फोड़ की. उन्होंने महल में लगे कई आइनों को तोड़ दिया. तोड़फोड़ की जिम्मेदारी लेते हुए करणी सेना ने कहा की हमने पहले ही इन आइनों को हटाने की मांग की थी.

रविवार को पद्मनी महल में पर्यटक बनकर घुसे करणी सेना के सदस्यों ने महल के कई आइनों को तोड़ दिया. ये आईने अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मावती से जोड़कर देखे जाते है. पद्मावती के बारे में प्रचलित कहनी में कहा जाता है की अलाउद्दीन खिलजी इन्ही आइनों को पद्मावती की सूरत देखते थे. इसलिए टूरिस्ट गाइड भी इन आइनों को पद्मावती-खिलजी के प्रेम प्रसंग के सबूत के तौर पर पर्यटकों को दिखाते है.

करणी सेना का कहना है की यह बिलकुल गलत है की इन्ही आइनों में खिलजी पद्मावती की सूरत देखते थे. यह गलत प्रचार किया जा रहा है क्योकि उस समय आईने होते ही नही थे. इसलिए हमने पुरातत्व विभाग से 13 फरवरी को एक पत्र लिखकर मांग की थी की वो इन आइनों को हटा ले. लेकिन काफी दिन बीत जाने के बाद भी उन्होंने हमारी मांग पूरी नही की. इसलिए मजबूरन हमें यह कदम उठाना पड़ा.

उधर पुरातत्व विभाग ने किसी भी तरह के पत्र मिलने का खंडन किया है. उन्होंने कहा की हमें ऐसा कोई पत्र करणी सेना की तरफ से प्राप्त नही हुआ है. महल में तोड़फोड़ के बाद वहां के केयरटेकर प्रेमचंद शर्मा ने अज्ञात लोगो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है. मालूम हो की फिल्म ‘पद्मावती’ की शूटिंग के दौरान इसी करणी सेना के सदस्यों ने निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ मारपीट की थी.

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