Tuesday, October 26, 2021

 

 

 

कन्हैया की रिहाई और देशद्रोह का आरोप हटाना हमारे बस में नहीं: जेएनयू

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जेएनयू रजिस्ट्रार भूपेंद्र जुत्शी ने कहा, ‘‘पुलिस ने इन छात्रों को गिरफ्तार करने के लिए परिसर में प्रवेश करने की अनुमति मांगने के लिए हमसे अब तक संपर्क नहीं किया है। न ही हमने उनसे संपर्क किया है।’’

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने मंगलवार को कहा कि छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की रिहाई कराने और उस पर लगे देशद्रोह के आरोप को हटाने से संबंधित दोनों ही मुद्दे उसके नियंत्रण से परे हैं। जेएनयू प्रशासन ने यह बात शिक्षकों और छात्रों की इन मांगों के बीच कही कि उसे कन्हैया कुमार की रिहाई और उस पर लगे देशद्रोह के आरोप को हटाने की मांग करनी चाहिए। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र जुत्शी ने कहा, ‘‘हमने कन्हैया को गिरफ्तार नहीं किया है, हमने किसी पर देशद्रोह का आरोप भी नहीं लगाया है। इस मामले पर संज्ञान लेना पुलिस और अदालत का काम है। ये दोनों मांग हमारे नियंत्रण से बाहर हैं।’’

जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों ने सोमवार (22 फरवरी) मंगल कुलपति जगदीश कुमार से अपील की थी कि वह उन पांच छात्रों के पक्ष में रुख अपनाएं जिन्हें पुलिस देशद्रोह के मामले में ढूंढ़ रही थी और जो 10 दिन से अधिक समय तक फरार रहने के बाद विश्वविद्यालय परिसर पहुंच गए हैं।

कुलपति की अध्यक्षता में सोमवार को हुई जेएनयू के शीर्ष अधिकारियों की बैठक में परिसर में पांचों छात्रों की वापसी पर चर्चा हुई, लेकिन इस बारे में कोई फैसला नहीं किया जा सका कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को जेएनयू में प्रवेश की अनुमति दी जाए या छात्रों से समर्पण करने के लिए कहा जाए। जुत्शी ने कहा, ‘‘पुलिस ने इन छात्रों को गिरफ्तार करने के लिए परिसर में प्रवेश करने की अनुमति मांगने के लिए हमसे अब तक संपर्क नहीं किया है। न ही हमने उनसे संपर्क किया है।’’

परिसर में आयोजित विवादास्पद कार्यक्रम में कथित तौर पर भारत विरोधी नारे लगाए जाने पर देशद्रोह के आरोप में कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद पांच छात्र, उमर खालिद, अनिरबन भट्टाचार्य, जेएनयू छात्र संघ महासचिव राम नागा, आशुतोष कुमार और अनंत प्रकाश 12 फरवरी को विश्वविद्यालय परिसर से लापता हो गए थे। उन्होंने यह कहते हुए समर्पण करने से इनकार कर दिया था कि वे गिरफ्तारी के लिए तैयार हैं लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उल्लेख किया कि उनकी टीम कुलपति से प्रवेश की अनुमति के लिए विश्वविद्यालय परिसर के बाहर इंतजार करती रही। (Jansatta)

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