नई दिल्ली | रिलायंस जियो के भारतीय बाजार में उतरते है बाकी टेलिकॉम कंपनियों में हडकंप मच गया. जियो ने वेलकम और हैप्पी न्यू ऑफर के जरीये फ्री डाटा और कॉल देकर करीब 10 करोड़ ग्राहकों को अपने साथ जोड़ लिया. इस बात से घबराई बाकी टेलिकॉम कंपनियों ने कुछ और रास्ते तलाशने शुरू कर दिए. भारती एयरटेल ने टेलिनोर को अपने साथ मर्ज कर लिया तो आईडिया-वोडाफोन ने भी एक होने के संकेत देने शुरू कर दिए.

अब इस खबर पर भी मोहर लग चुकी है. सोमवार को कुमार मंगलम बिड़ला के स्वामित्व वाली टेलिकॉम कंपनी आईडिया सेल्युलर ने ब्रिटिश टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन के साथ विलय की घोषणा कर दी. कंपनी ने सोमवार को दोनों कंपनियों की बोर्ड बैठक के बाद इस बात का एलान किया. इस विलय के बाद जिस नयी कंपनी का उदय होगा वो भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी होगी.

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अभी तक भारती एयरटेल देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी थी. इस मर्जर के बाद नयी कंपनी के पास देश के करीब 40 फीसदी उपभोगता होंगे. यही नही नयी कंपनी के पास देश के स्पेक्ट्रम में करीब 25 फीसदी की भी हिस्सेदारी होगी. जो मानको से एक फीसदी ज्यादा है. किसी भी टेलिकॉम कंपनी को 24 फीसदी से ज्यादा स्पेक्ट्रम नही बेचा जा सकता इसलिए नयी कंपनी को एक फीसदी स्पेक्ट्रम का हिस्सा बेचना होगा.

विलय की शर्तो के अनुसार नयी कंपनी में आईडिया के सभी शेयरों का विलय होगा जबकि वोडाफोन के इंडस टावर में 42 फीसदी शेयर को छोड़कर बाकि सभी शेयर विलय कर दिए जाएगा. नयी कंपनी में वोडाफोन की 45 फीसदी हिस्सेदारी होगी जबकि आईडिया की 26 फीसदी जो आगे चलकर बराबर हो जाएगी. अभी वोडाफोन नयी कंपनी में सीईओ और सीऍफ़ओ के पद की मांग कर रही है जबकि उन्हें कुमार मंगलम बिडला को चेयरमैन बनाने पर कोई आपत्ति नही है. इस विलय की पूरी प्रक्रिया करीब एक साल में पूरी कर ली जाएगी.

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