नई दिल्ली | पिछले साल 9 फरवरी को देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में से एक जेएनयु में कश्मीर की आजादी के नारे लगाए गए. जिसके बाद पुरे देश में जेएनयु के खिलाफ एक मुहीम शुरू हो गयी. बीजेपी और उसकी छात्र इकाई ABVP ने पुरे देश में जेएनयु के खिलाफ प्रचार शुरू कर दिया. उस मुहीम के जरिये यह बताने की कोशिश हो रही थी की जेएनयु में पढने वाले और पढ़ाने वाले देश द्रोही है.

हालांकि केंद्र सरकार के दावों के बावजूद अभी तक नारे लगाने वाले लोग गिरफ्तार नही हुए है. इस बात को एक साल से भी ज्यादा हो चूका है. हाँ पुलिस ने उस कार्यकर्म का आयोजन करने वाले उमर खालिद, कन्हैया कुमार और अनिर्बान भट्टाचार्य को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था. बाद में सभी छात्रों को जमानत पर रिहा कर दिया गया. एक साल बीत जाने के बाद कोई दोषी गिरफ्तार तो नही हुए लेकिन यूनिवर्सिटी में यह घटना एक बार फिर हुई है.

गुरुवार को जेएनयु के स्कूल ऑफ़ सोशल साइंसेज के नए खंड की दिवार पर कुछ पोस्टर को लगे देखा गया. इन पोस्टर पर कश्मीर और फलिस्तीन को आजाद करने की मांग लिखी हुई थी. पोस्टर देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन में हडकंप मंच गया. उन्होंने तुरंत इन पोस्टर को हटाने का निर्देश दिया. इन पोस्टर में लिखा था,’ कश्मीर की आजादी.. मुक्त फिलिस्तीन.. आत्मनिर्णय का अधिकार जिंदाबाद-डीएसयु’.

इन पोस्टर्स को वामपंथी रूझान वाले संगठन डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन ( डीएसयु ) द्वारा लगाए गए है. उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य इसी संगठन से ताल्लुक रखते है. हालाँकि कुछ छात्रों का मानना है की इस मामले को बेवजह तुल दिया जा रहा है क्योकि डीएसयु इस तरह के पोस्टर पहले भी यूनिवर्सिटी परिसर में लगाता आया है. हालाँकि यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का मानना है की यह सब हंगामा करने के लिए किया जा रहा है जिससे शैक्षिक सत्र में बाधा पहुंचाई जा सके.


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