नई दिल्ली | करीब दस साल पहले अजमेर की ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती दरगाह पर हुए बम ब्लास्ट मामले में विशेष अदालत ने दो आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई है. हालाँकि मामले में तीन लोगो को दोषी करार दिया था लेकिन एक आरोपी की पहले ही मौत हो चुकी है. मालूम हो की इसी मामले में असीमानंद समेत छह लोगो को पहले ही बरी कर दिया गया था.

बुधवार को एनआईए की विशेष अदालत ने 10 साल पुराने अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में फैसला सुनाया. 8 मार्च को दोषी करार दिए गए भावेश , देवेन्द्र और सुनील जोशी को उम्र कैद की सजा सुनाई गयी. कोर्ट ने भावेश और देवेन्द्र को सेक्शन 120 बी के तहत अपराधित साजिश रचने , 295 ए के तहत जाबूझकर किसी धर्म के लोगो की भावनाए आहात करने और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट और अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट के तहत दोषी ठहराया था.

मालूम हो की 11 अक्टूबर 2007 को अजमेर की ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के नजदीक रोजा इफ्तार के समय हुए बम ब्लास्ट में तीन लोग मारे गए थे जबकि 15 लोग घायल हुए थे. उस समय वहां से एक जिन्दा बम भी बरामद हुआ था जिसे बाद में डिफ्यूज कर दिया गया. करीब 3 साल बाद राजस्थान एटीएस ने इस मामले में तीन लोगो को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.

1 अप्रैल 2011 को यह केस एनआईए को सौप दिया गया. करीब एक हफ्ते बाद एनआईए ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. जिसमे से करीब 8 आरोपी पहले से ही 2010 से जेल में थे जबकि एक आरोपी को जमानत पर रिहा किया गया था. जबकि तीन आरोपी अभी भी फरार है. इनमे से एक आरोपी सुनील की पहले ही मौत हो चुकी है. इसी महीने की 8 तारीख को एनआईए अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए असीमानंद समेत छह लोगो को रिहा कर दिया.

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