पटना | सत्ता पक्ष और विपक्ष का तो रिश्ता ही तकरार का रहा है. लेकिन यह बहुत कम देखने को मिला है की केन्द्रीय मंत्री और प्रदेश के मंत्री एक ही मंच पर उलझ पड़े. दो अलग अलग पार्टी के होने के बावजूद अभी तक यह प्रथा चली आ रही थी की मंच पर मौजूद राज्य और केंद्र सरकार के मंत्री एक दुसरे से सलीके से पेश आयेंगे. लेकिन देश की राजनीती के साथ साथ राजनीती करने वाले भी बदल गए है.

बिहार की राजधानी पटना में आयोजित डिजिटल मेले की एक सार्वजनिक सभा में सूबे के आईटी मंत्री और केन्द्रीय क्रषि मंत्री आपस में उलझ पड़े. यहाँ तक की दोनों को इस बात का भी इल्म नही रहा की उनमे से एक , प्रदेश का तो दूसरा पुरे देश का प्रतिनिधित्व करता है. मंच पर ही तू तू मैं मैं शुरू होने से वहां एक अजीब माहौल पैदा हो गया.

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दरअसल डिजिटल मेले की सभा में बोलते हुए कृषि मंत्री राधेमोहन सिंह ने नोट बंदी की तारीफों के पुल बाँध दिए. उन्होंने इसकी तारीफ करते हुए कहा की आतंकवाद और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए उठाये गए इस कदम के लिए मैं मोदी जी का धन्यवाद देता हूँ. इसके बाद राधेमोहन ने डिजिटल ट्रांसेक्सन के कई फायदे गिनाये और लोगो से अपील की कि वो भ्रष्टाचार समाप्त करने की इस लड़ाई में अपना योगदान दे और कैश लेस ट्रांसेक्सन को बढ़ावा दे.

राधेमोहन के संबोधन से तिलमिलाए बिहार के आईटी मंत्री अशोक चौधरी ने माइक पकड़ते ही नोट बंदी की बुराई करनी शुरू कर दी. उन्होंने कई उदहारण देकर बताया की इससे देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी और लोगो के रोजगार छीन गए है. इस दौरान अशोक चौधरी ने एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा की सरकार के इस कदम से एक रूपए भी कालेधन की प्राप्ति नही हुई.

अशोक चौधरी ने डिजिटल ट्रांसेक्सन की भी बुराई की और कहा की आप गर्दन पकड़कर किसी से डिजिटल पेमेंट नही करा सकते. अशोक चौधरी के वार पर पलटवार करने के लिए राधेमोहन सिंह ने एक बार फिर माइक संभाला और कहा की देखो कौन पार्टी यह कह रही है, जिसने देश में 60 साल शासन किया हो उसको यह बात शोभा नही देती.

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