Monday, August 2, 2021

 

 

 

सीबीआई की सुप्रीम कोर्ट से अपील , लाल कृष्ण आडवाणी, उमा भारती समेत 13 नेताओं के खिलाफ चले ट्रायल

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नई दिल्ली | बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी , मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह समेत 13 नेताओं के लिए काफी अहम् होगा. कोर्ट तय करेगा की इन सभी नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का ट्रायल चलना चाहिए या नही. हालाँकि सीबीआई ने कोर्ट से अपील की है की वो ट्रायल चलाने की अनुमति दे.

खबर है की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो चुकी है. सीबीआई ने आडवाणी, जोशी , कल्याण सिंह और उमा भारती समेत 13 नेताओं पर अपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाते हुए मांग की, की इन सभी नेताओं के खिलाफ ट्रायल चलाया जाना चाहिए. इसके अलावा सीबीआई ने कोर्ट से कहा की रायबरेली की अदालत में चल रहे केस को भी लखनऊ की स्पेशल कोर्ट के साथ जॉइंट ट्रायल होना चाहिए.

मालूम हो की 2010 में इलाहबाद हाई कोर्ट ने आडवाणी समेत 13 नेताओ पर से अपराधिक साजिश रचने की धारा को हटाने का आदेश दिया था. जिसको 2011 में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए थे की वो इलाहबाद हाई कोर्ट के फैसले को पलट सकती है. उस समय कोर्ट ने कहा था की केवल टेक्निकल ग्राउंड पर राहत नही दी जा सकती. इसलिए उनके खिलाफ साजिश रचने का ट्रायल चलना चाहिए.

अदालत ने यह भी पुछा था की क्यों न दो अलग अलग अदालतों में चल रहे मुक़दमे को एक ही अदालत में ट्रान्सफर कर दिया जाए? दरअसल सीबीआई भी यह मांग कर रही है की रायबरेली में चल रहे मुक़दमे को लखनऊ की स्पेशल अदालत में शिफ्ट कर दिया जाये. हालाँकि इस पर आडवाणी ने आपत्ति जताते हुए कहा था की मामले के सभी 183 गवाहों को दोबारा बुलाना पड़ेगा जिसमें काफी परेशानी होगी.

दरअसल 1992 में बाबरी मस्जिद गिराने के बाद कारसेवको और मस्जिद से 200 मीटर दूर मौजूद नेताओं के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज हुई थी. एक एफआईआर की सुनवाई लखनऊ की स्पेशल कोर्ट जबकि दूसरी एफआईआर की सुनवाई रायबरेली की अदालत में की गयी. आडवाणी समेत 13 नेताओ के खिलाफ रायबरेली अदालत में ट्रायल चला जबकि लखनऊ की अदालत में कारसेवकों के खिलाफ.

1993 में पुलिस ने अदालत में जो चार्जशीट दाखिल की उसमे सभी नेताओ के खिलाफ 120बी (अपराधिक साजिश रचने) की धारा भी लगायी गयी. जिसको बाद में चुनौती दी गयी. रायबरेली की कोर्ट ने सभी नेताओं से यह धारा हटाने का आदेश दिया जिस पर 2010 में हाई कोर्ट ने भी मुहर लगा दी. 2011 में सीबीआई ने अदालत के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जिस पर सुनवाई चल रही है.

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