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आगरा | मोदी सरकार के नोट बंदी के फैसले के पीछे चाहे जो भी कारण रहे हो लेकिन यह अब जानलेवा साबित हो रही है. नोट बंदी से लोगो की जान जा रही है लेकिन सरकार अपनी पीठ थपथापने में लगी है. बीजेपी नेता और उनके समर्थक नोट बंदी को राष्ट्र्वाद से जोड़कर दलील देते है की जब एक फौजी सीमा पर खड़े रहकर हमारी रक्षा कर सकता है तो हम देश हित में कुछ देर एटीएम और बैंक की लाइन में खड़े नही हो सकते. लेकिन तब क्या हो जब नोट बंदी की वजह से कोई फौजी ही आत्महत्या कर ले?

फ़ौज को हर मुद्दे से जोड़ने वालो बीजेपी नेताओ और उनके समर्थको के लिए यह खबर आँख खोल देने वाली है. जिस नोट बंदी के समर्थन में वे रोज टीवी और सोशल मीडिया पर खूब तर्क देते है , क्या वो उन परिवार के घर जाकर उनको बता सकते है की आपके घर का सदस्य देश हित में कुर्बान हो गया? आगरा के रहने वाले फौजी राकेश चंद ने कैश की किल्लत से परेशान होकर खुदख़ुशी कर ली.

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राकेश चंद सीआरपीएफ में सिपाही के पद पर तैनात थे. 1990 में कश्मीर के बारामुला में हुए आतंकी हमले में राकेश ने पांच गोलिया अपने सीने में खायी थी. जिसकी वजह से उनको ह्रदय सम्बन्धी बिमारी हो गयी. साल 2012 में उन्होंने स्वेच्छिक रिटायरमेंट ले लिया. लेकिन उनका इलाज अब भी जारी था. नोट बंदी के बाद घर में कैश की किल्लत होने लगी तो उनका इलाज भी बाधित होने लगा.

राकेश आगरा के ताजगंज स्थित एसबीआई ब्रांच में कैश मिलने की उम्मीद में रोज जाते थे. उनका एटीएम कुछ दिन पहले ब्लाक हो गया था इसलिए बैंक ही अकेला रास्ता था जिससे उनको कैश मिल सकता था. कई दिन चक्कर काटने के बाद भी जब उनको कैश नही मिला तो उन्होंने तंग आकर खुदखुशी कर ली. राकेश के बड़े बेटे सुशील ने बताया की शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे पिता जी ने अपनी लाइसेंसिंग बन्दूक से गोली मारकर आत्महत्या कर ली.

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