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नई दिल्ली | नोट बंदी के बाद से सरकार और आरबीआई ने करीब 59 बार नियम बदले है. इसकी वजह से सरकार को काफी फजीहत भी झेलनी पड़ी है. सरकार पहले नियम जारी करती है और अगले दिन उससे युटर्न ले लेती है. इसी वजह से बैंकों में पुराने नोट जमा कराने, नये नोटों की निकासी करने आये लोगो को काफी मुसीबत का सामना करना पड़ता है. अब आरबीआई ने एक और युटर्न लिया है.

आरबीआई ने सोमवार को जारी एक सर्कुलर को वापिस ले लिया है. इस सर्कुलर में पुराने नोट बार बार बैंक में जमा करने पर रोक लगा दी गयी थी. यही नही 5000 से अधिक पुराने नोट बैंक में जमा कराने पर पूछताछ की भी प्रावधान था. ऐसे में बैंक के दो कर्मचारी पूछताछ करेंगे और पूछेंगे की आपने अभी तक पुराने नोट बैंक में क्यों जमा नही किये. जवाब से संतुष्ट होने पर ही पैसे जमा करने की अनुमति मिलती.

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अब आरबीआई ने इस पाबंदी को वापिस ले लिया है. नए सर्कुलर में आरबीआई ने कहा की जिसका खाता केवाईसी के अनुरूप है वो जितनी चाहे उतनी रकम खातो में जमा कर सकता है. इसके अलावा एक बार वाली शर्त भी हटा ली गयी है. अब कितनी भी बार आप बैंक जाकर पुराने नोट जमा कर सकते है. यही नही 5000 से ऊपर रकम जमा करने पर होने वाली पूछताछ से भी छूट दे दी गयी है.

अब इस मामले में राजनीती भी शुरू हो गयी. कांग्रेस ने सरकार और आरबीआई को कठघरे में खड़ा करते हुए कह की इससे साबित होता है की नोट बंदी बिना तैयारी के लागू की गयी. इसके अलावा कांग्रेस ने आरबीआई का नया नामकरण भी किया. कांग्रेस ने रिज़र्व बैंक इंडिया को रिवर्स बैंक ऑफ़ इंडिया नाम दिया. वही बीजेपी ने इस फैसले का बचाव किया है. उन्होंने कहा की लोगो की दिक्कतों को देखते हुए फैसले में बदलाव किये जा रहे है जो उचित है.

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