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अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए सौंपे जाने की वकालत करने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMP LB) से निष्कासित मौलाना सलमान नदवी को अब दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष डॉ. जफर-उल-इस्लाम खान का साथ मिला है.

जफर-उल-इस्लाम ने बाबरी मस्जिद पर मौलाना सलमान नदवी के बयान को सही और तर्कसंगत बताया है. न्यूज़ 18 उर्दू अखबार में  प्रकाशित एक लिखित बयान में उन्होंने कहा, “बाबरी मस्जिद का मुद्दा हिंदुओं और मुसलमानों द्वारा  राजनीतिक रूप से जटिल बना दिया गया है.”

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उन्होंने कहा, मुसलमानों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने आम तौर पर उत्साह से कहा कि मस्जिद एक मस्जिद के रूप में रहेगी, भले ही पवित्र कुरान और हदीस में ऐसा कोई तर्क नहीं है. विभिन्न मुस्लिम देशों में मस्जिदों को उनके पिछले स्थानों से स्थानांतरित करने के कई उदाहरण हैं. ऐसा मदीना (सऊदी अरब) और त्रिपोली (लीबिया) में भी हुआ है.

जफर-उल-इस्लाम ने कहा, वहां तक मत जाओ, हमारे देश में हजारों मस्जिद हैं, जो भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण या गैर-मुसलमानों के कब्जे में हैं. दिल्ली में लगभग 30 ऐसी मस्जिदें हैं, लेकिन हमारे खून उनके लिए उबाल नहीं आता और ये फार्मूला वहां पर लागू नहीं होता है. जिसमे कहा गया कि एक बार मस्जिद जहाँ बन गई. कयामत तक उसी जगह पर मस्जिद रहेगी.

डॉ इस्लाम ने दावा किया कि धार्मिक नेताओं ने यह भी घोषणा की है कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुसलमानों के खिलाफ होगा, तो वे इसे स्वीकार करेंगे. “क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ये बयान बदल जाएगा? यह विश्वास करना बेहतर होगा कि मुस्लिम समुदाय के लक्ष्यों और उद्देश्यों को सुरक्षित रखने के लिए मस्जिद की जगह बदल सकती है.”

उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियों को पारस्परिक निपटान के लिए अपील करनी चाहिए. ताकि दशकों पुरानी समस्या का समाधान हो सके.