ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के सदस्य जफरयाब जिलानी ने मंगलवार को तीन तलाक के सबंध में आए सुप्रीम कोर्ट  के फैसले का स्वागत किया. साथ ही सवाल भी उठाया कि उन मुस्लिम महिलाओं का क्या होगा जो शरीयत का पालन करती है.

उन्होंने कहा कि तीन तलाक को समाप्त करने में हमें कोई परेशानी नहीं है. क्योंकि हम भी इसे समाप्त करने में लगे हुए है. लेकिन समस्या बड़े पैमाने पर शरियत का पालन करने वाली मुस्लिम महिलाओं से जुडी है. जब इन महिलाओं को उनके पतियों द्वारा तलाक दिया जाएगा. तब वे क्या करेंगी ?

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जिलानी ने कहा, शरिया के अनुसार तलाक (ट्रिपल तालाक) मान्य माना जाएगा, लेकिन अदालत के अनुसार यह अमान्य है. तो, ऐसी महिलाओं के भविष्य के संबंध में, अदालत ने क्या दिशानिर्देश दिए हैं ? उन्होंने कहा, क्या अदालत ने उनके लिए मामले को जटिल कर दिया है या उनके लाभ के लिए फैसला किया है, इस फैसले को पढ़ने के बाद ही टिप्पणी की जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि मुस्लिम समुदाय द्वारा ट्रिपल तालाक “असंवैधानिक”, “मनमाना” और “इस्लाम का हिस्सा नहीं” है.

3: 2 के बहुमत के फैसले के अनुसार पांच न्यायाधीश की संवैधानिक पीठ ने कहा कि ट्रिपल तलाक को कोई संवैधानिक संरक्षण नहीं है.

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