नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को  शहरों में बेघर लोगों को आवास देने दे जुड़े के मामले की सुनवाई करते हुए योगी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आप लोगों से कुछ होता नहीं और इल्जाम लगाते है कि देश हम चलाने की कोशिश कर रहे.

न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि आपका तंत्र विफल हो गया है.’ पीठ ने कहा, ‘यदि आप लोग काम नहीं कर सकते हैं तो ऐसा कहिए कि आप ऐसा नहीं कर सके. हम कार्यपालिका नहीं हैं. आप अपना काम नहीं करते हैं और जब हम कुछ कहते हैं तो देश में सभी यह कहकर हमारी आलोचना करते हैं कि हम सरकार और देश चलाने का प्रयास कर रहे हैं.’

कोर्ट ने कहा कि दीनदयाल अंत्योदय योजना-नैशनल अर्बन लाइवलीहुड मिशन स्कीम 2014 से लागू है, लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने असल में कुछ किया ही नहीं है. कोर्ट ने कहा, ‘हम लोग ऐसे इंसानों के बारे में बात कर रहे हैं, जिनके पास रहने का कोई ठिकाना नहीं है। उनके रहने का इंतजाम तो करना होगा.’

हालाँकि कोर्ट के समक्ष पेश हुए यूपी सरकार के अतिरिक्त सालिस्टर जनरल ने कहा कि प्रदेश सरकार इस स्थिति के प्रति सजग है और शहरी बेघरों को बसेरा मुहैय्या कराने के लिए अथक प्रयास कर रही है.

इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि उत्तर प्रदेश में यह बहुत बड़ा काम है क्योंकि वहां एक लाख अस्सी हजार बसेरों की आवश्यकता है और अभी करीब सात हजार ही बने हैं.


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