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जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने गुरुवार को विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ‘इस्लामिक विरासत: सद्भावना एवं उदारत’ विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि इस्लाम में विश्व के लिए शांति और संवाद का संदेश है.

अब्दुल्ला ने कहा, ‘आतंक के खिलाफ आज का वैश्विक युद्ध विभिन्न धर्मो और लोगों के बीच की लड़ाई नहीं है. यह उग्रवाद, नफरत और हिंसा के खिलाफ सभी विश्वासों और समुदायों के उदारवादियों की लड़ाई है.’ उन्होंने कहा, जो भी समाचारों में सुना जाता है और धर्म के बारे में दिखाया जाता है, वह लोगों को विभाजित करता है.

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उन्होंने कहा कि हम सबको दुनिया के सामने खड़े इस खतरे को बहुत गंभीरता से लेना होगा और मकाहब को समझना होगा. जॉर्डन किंग ने कहा, ‘इस तरह की नफरत भरी विचारधारा ईश्वर के शब्द को बिगाड़ रही है ताकि संघर्षो को भड़काया जा सके और अपराधों व आतंक को सही साबित किया जा सके.’

इस्लाम की शिक्षाओं को पर जोरे देते हुए जॉर्डन के राजा ने कहा कि इस्लाम की शिक्षाओं को समझना जरूरी है. उसमें लिखा है कि पड़ोसी से प्रेम करना चाहिए. मुसलमान का फर्ज है कि जिनकी सुरक्षा कोई न करे, वे उसकी सुरक्षा करें. किसी अनजान व्यक्ति को उसी प्रकार से पनाह दे, जैसे किसी अपने को कठिनाइयों में दी जाती है.

उन्होंने कहा कि इस्लाम विश्व में संवाद एवं शांति का संदेश फैलाने के लिए है. हमारा संकल्प होना चाहिए कि हम हर किसी के लिए सर्वसमावेशी और सद्भावपूर्ण बने चाहे वे हिंदू हों या कोई और. उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकं एक बहुत बुद्धिमानी भरी बात है और इस्लाम के मूल्यों के अनुरूप है.

जॉर्डन के शाह ने कहा कि पूरी दुनिया में 1.8 अरब मुसलमान हैं जो समूची मानव जाति का एक चौथाई हैं. यह सहिष्णुता पर आधारित  मजहब है जो मोहम्मद (सल्ल.) के संदेश को लेकर आगे बढ़ा है कि अन्य लोगों के प्रति दयालु एवं कृपालु बनो.