लखनऊ | उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा की आरएसएस पर विपक्ष की आलोचना गैर जरुरी है क्योकि इस संगठन का राजनीती से कोई लेना देना नही है. इस दौरान उन्होंने राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष के हंगामे की भी आलोचना की. इसके अलावा योगी ने प्रदेश में बिगडती कानून व्यवस्था पर भी अपना जवाब दिया.

शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में योगी आदित्यनाथ ने, राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में हिस्सा लिया. चर्चा के जवाब में योगी ने कहा की किसी भी ऐसे संगठन की चर्चा करना गलत है जिसका राजनीती से कोई लेना देना नहीं है. इसलिए आरएसएस पर चर्चा गैर जरुरी है. आपको बता दे की आरएसएस दुनिया का पहला ऐसा संगठन है जो सरकार से कोई मदद नही लेता.

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योगी ने आरएसएस की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा की अगर आरएसएस और डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी (जनसंघ संस्थापक) न होते तो आज पंजाब , कश्मीर और बंगाल , पाकिस्तान का हिस्सा होते. इस दौरान योगी ने वन्देमातरम पर हो रहे विवाद पर भी बयान दिया. उन्होने कहा की कुछ लोग राष्ट्रिय गीत को संप्रदायिकता से जोड़ने का प्रयास कर रहे है, अगर आरएसएस न होता तो लोग स्कूल में वन्देमातरम को भूल गए होते.

योगी ने आरएसएस की उपलब्धिया बताते हुए कहा की आरएसएस देश में करीब 64 हजार शैक्षिक संसथान चला रहा है. इसके अलावा योगी ने प्रदेश की बिगडती कानून व्यवस्था पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा की वो लोग जो 5-5, 10-10 साल सत्ता में रहे वो हमसे दो महीने का हिसाब मांग रहे है की तुमने इन दो महीने में क्या किया? जैसे हमें सरकार में रहते हुए 100 साल हो गए हो.

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