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लखनऊ | प्रेम की निशानी माने जाने वाले ताजमहल को देखने के लिए देश-विदेश से लाखो पर्यटक आते है. प्रदेश के लिए ताजमहल एक कमाई का जरिया बना हुआ है. इसलिए ताजमहल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है. हालाँकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ताजमहल को भारतीय संस्कृति का हिस्सा नही मानते. इसलिए इस बात का अंदेशा था की प्रदेश में बीजेपी सरकार आने के बाद ताजमहल को इतना महत्तव न दिया जाए.

यह बात उस समय और पुख्ता हो गयी जब राज्य सरकार ने प्रदेश की पर्यटन स्थलों की सूचि में से ताजमहल को बाहर कर दिया. दरअसल सोमवार को सोशल मीडिया पर एक खबर वायरल हो गयी जिसमे कहा गया की योगी सरकार ने विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर एक बुकलेट जारी की है जिसमे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की सूचि दी गयी है. लेकिन हैरान कर देनी वाली बात यह है की इस सूचि में से ताजमहल का नाम गायब है.

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देश के सबसे बड़े पर्यटन स्थलों में से एक ताजमहल को सूचि से बाहर करने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गयी. शाम होते होते यह खबर टीवी न्यूज़ चैनल में भी दिखाई जाने लगी. इसलिए प्रदेश सरकार को मामले में अपनी सफाई देने के लिए आगे आना पड़ा. प्रेस नोट के जरिये प्रदेश सरकार की और से इस खबर का खंडन करते हुए कहा गया की सरकार ताज महल की उपेक्षा नही कर रही है बल्कि ताज से जुड़े पर्यटन स्थल के विकास के लिए एक खास पैकेज भी जारी किया गया है.

राज्य सरकार में पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी और प्रमुख सचिव पर्यटन अवनीश अवस्थी ने बताया की वर्ल्ड बैंक की प्रो-पुअर टूरिज्म योजना के तहत 370 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की हैं. इसमें से अकेले ताजमहल के लिए 156 करोड़ रूपए प्रस्तावित किये गए है. ऐसे में ताजमहल की उपेक्षा करने का सवाल ही नही उठता. केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद प्रस्तावित विकास कार्य शुरू कर दिए जायेंगे.

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