govt schools

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बने हुए क़रीब 9 महीने हो चुके है। इन 9 महीनो में योगी सरकार अपने कई फ़ैसलों के कारण सुर्ख़ियो में रही है। चाहे अवैध बूचड़खानो पर कार्यवाही हो , रोडवेज और सरकारी भवनो पर भगवा रंग कराने का फ़ैसला हो या फिर मदरसों में स्वतंत्रता दिवस के मौक़े पर राष्ट्र्गान गाने का आदेश। इन सभी फ़ैसलों ने विपक्षी दलो को योगी सरकार की आलोचना करने का मौक़ा दे दिया।

हालाँकि चुनाव प्रचार के समय भाजपा ने इन मुद्दों पर जनता से वोट नही माँगी थी। लेकिन सत्ता में आने के बाद योगी सरकार जनता के मूल मुद्दों को भूलकर ग़ैर ज़रूरी निर्णय लेने में मशगूल है। प्रदेश में अभी सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की हालत बद से बदतर है लेकिन इन पर ध्यान नही दिया जा रहा। प्रदेश में अपराधी बेख़ौफ़ घूम रहे है और रोज़ाना किसी न किसी अपराध को अंजाम दे रहे है। इन पर भी ध्यान नही दिया जा रहा।

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न जाने प्रदेश में अभी भी कितने ऐसे क्षेत्र है जो सीधे सीधे जनता से जुड़े हुए है और उनमें सुधार होना अभी बाक़ी है। फिर भी उधर किसी का ध्यान नही है। गुरुवार को योगी सरकार ने एक और ऐसा आदेश जारी किया जिस पर बहस होना बहुत ज़रूरी है। योगी सरकार ने प्रदेश के सभी स्कूलों में भगवद् गीता पर आधारित गायन प्रतियोगिताओं का आयोजन कराने का आदेश दिया है। इस प्रतियोगिता में जीतने वाले प्रतियोगी को राज्य स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने का मौक़ा मिलेगा।

न्यूज़ एजेन्सी भाषा के अनुसार राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग के सभी मंडलों के संयुक्त निदेशकों को यह आदेश जारी कर दिया गया है। उनको यह सुनिस्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी बोर्डों के तहत आने वाले सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में जिला और मंडल स्तर पर ये प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। सरकार के इस आदेश से सरकारी स्कूलों की हालत कैसे सुधरेगी यह तो सरकार का कोई नुमाइंदा ही बता सकता है। लेकिन यह मात्र टैक्स पेयर के पैसों की बर्बादी के अलावा कुछ भी नही है क्योंकि इस प्रतियोगिता के लिए छात्र पर आने वाले तमाम खर्चों को संबंधित स्कूल प्राधिकारी वहन करेंगे।

प्रशांत चौधरी  

नोट-उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार है।

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