नई दिल्ली | देश की अर्थव्यवस्था को लेकर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और वर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली आमने सामने आ गए है. अब यह जंग आंकड़ो और तथ्यों के आधार पर न होकर व्यक्तिगत हो गयी है. गुरुवार को अरुण जेटली ने यशवंत सिन्हा के आरोपों पर सफाई देते हुए उन पर कई निजी हमले किये. उन्होंने कहा की 80 साल की उम्र में यशवंत को नौकरी की तलाश है. अब जेटली के इन आरोपों पर यशवंत सिन्हा ने भी पलटवार किया है.

शुक्रवार को जेटली के आरोपों पर बोलते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा की मैं मुद्दों की बात कर रहा हूँ जबकि वो व्यक्तिगत हमले कर रहे है. आखिर एक ऐसा व्यक्ति जिसने कभी लोकसभा की शक्ल नही देखी , वो मुझ पर नौकरी तलाश करने का आरोप कैसे लगा सकता है. मैंने आईएस की जॉब छोड़कर राजनीती ज्वाइन की थी. इसके 15 दिन के अन्दर मैंने अपना राजनितिक चुनाव लड़ा और जीता था.

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यशवंत सिन्हा ने आगे कहा की लोकसभा पहुँचने वाला इंसान ही आम लोगो की समस्याओ और अपेक्षाओ को समझ सकता है. जेटली आज की नौजवान पीढ़ी से जाकर पूछें कि क्या उन्हें नौकरी मिल रही है ? मुझे नहीं पता कि अरुण जेटली के पास कितने लोग नौकरी मांगने के लिए आते हैं. वह कभी लोकसभा में रहे ही नहीं तो उन्हें इस बारे में पता नहीं होगा. पिछले 30 सालो से वह संसदीय क्षेत्र की तलाश कर रहे है.

यशवंत सिन्हा यही नही रुकी उन्होंने हमले जारी रखते हुए कहा की मैंने अपनी आईएस की जॉब छोड़कर राजनीती ज्वाइन की. तब मेरी 12 साल की नौकरी बची हुई थी. 1988 में मुझे वीपी सिंह ने राष्ट्रपति भवन शपथ लेने के लिए बुलाया था लेकिन मैंने मना कर दिया क्योकि यह न्याय नही था. लेकिन खुद जेटली बिना चुनाव जीते अटल सरकार में राज्य मंत्री बने. वो मुझ पर नौकरी की तलाश करने का आरोप नही लगा सकते.

जेटली के उस बयान पर जिसमे उन्होंने कहा की नोट बंदी का विरोध करने वाले कालेधन के पक्षधर पर , यशवंत सिन्हा ने कहा की एचएसबीसी ने 740 लोगो की लिस्ट जारी की थी. इस पर अभी तक सरकार ने क्या कार्यवाही की, पनामा पेपर्स लीक में सरकार ने क्या कार्यवाही की. इस मामले में राम जेठमलानी मोदी जी को 9 पेज का पत्र भी लिख चुके है. जसवंत सिन्हा के बयान पर उन्होंने कहा की जसवंत ने मुझ पर कोई निजी हमला नही किया.

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