tipuu

16वीं सदी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान की जयंती को लेकर सियासी कोहराम मचा हुआ है। वोट बैंक की राजनीति के चलते आज इस महान शासक को बदनाम कर सियासी फाइदा उठाने की कोशिश की जा रही है। जिसके लिए उनकी छवि को दागदार बनाने की कोशिश भी हो रही है।

टीपू सुल्तान ने अपने समय के शासकों में न केवल महान थे। बल्कि टीपू सुल्तान ने अपने शासन में ऐसे प्रयोग किए। जिसे उनकी छवि और मजबूत होती है। टीपू सुल्तान ने युद्ध के दौरान छोटे-छोटे रॉकेट का इस्तेमाल किया था। दुनिया में वो अपनी तरह का पहला प्रयोग था इसलिए उन्होंने दुनिया का पहला मिसाइल मैन भी कहा जाता है।

बीबीसी की एक खबर के मुताबिक, दक्षिण में राज्य विस्तार के दौर में टीपू सुल्तान और उनके पिता ने युद्ध में रॉकेट तकनीक का जमकर इस्तेमाल किया।उस दौर में टीपू की सेना जिन रॉकेट का इस्तेमाल करती थी। वो छोटे और गजब मारक होते थे. इन रॉकेटों को लॉन्च करने के लिए लोहे की नली का इस्तेमाल किया जाता था।

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ये रॉकेट 2 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम हुआ करते थे।  इतिहासकारों के मुताबिक पोल्लिलोर की लड़ाई में इन्हीं रॉकेटों के इस्तेमाल ने पूरा खेल ही बदलकर रख दिया। इससे टीपू की सेना को खासा फायदा हुआ। अंग्रेजों के खिलाफ पोल्लिलोर की लड़ाई में जब उन्होंने रॉकेट का इस्तेमाल किया तो वो हैरान रह गए।

इसी रॉकेट की तकनीक का इस्तेमाल उन्होंने सम्राट नेपोलियन के खिलाफ किया था। इतिहासकारों के मुताबिक ये प्रयोग उन्हें ज्यादा फायदा नहीं दिला सका। क्योंकि वो किलेबंदी को नहीं भेद सके थे। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल कार्यक्रम के जनक एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी किताब ‘विंग्स ऑफ़ फ़ायर’ में लिखा था कि मैंने लंदन के साइंस म्यूजियम में टीपू सुल्तान के कुछ रॉकेट देखे। ये उन रॉकेट में से थे जिन्हें अंग्रेज अपने साथ ले गए थे।

अब्दुल कलाम ने किताब में आगे लिखा कि नासा के एक सेंटर में टीपू की सेना की रॉकेट वाली पेंटिग देखी थी। कलाम लिखते हैं, “मुझे ये लगा कि धरती के दूसरे सिरे पर युद्ध में सबसे पहले इस्तेमाल हुए रॉकेट और उनका इस्तेमाल करने वाले सुल्तान की दूरदृष्टि का जश्न मनाया जा रहा था। वहीं हमारे देश में लोग ये बात या तो जानते नहीं या उसको तवज्जो नहीं देते।”

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