नयी दिल्ली :- 20मार्च ‘ 2016

 

 

आल इंडिया उलेमा मशाइख बोर्ड के तहत वर्ल्ड सूफी कांफ्रेंस में देश विदेश से आये हुए सूफी विद्वानों ने खुलकर इस्लाम और इसके अमन मुहब्बत के पैगाम के मेसेज को फैलाया!

तंजीम के अध्यक्ष सय्यद मुहम्मद अशरफ ने देश में जारी फिरकापरस्ती को रोकने की अपील की

इस्लाम के अमन मुहब्बत के पैगाम को तालिबानी अल काइदा और ISIS ने बहुत नुकसान पहुँचाया है यह दहशतगर्द हैं इनसे नौजवान अपने को अलग करें!

अजमेर शरीफ में ग़रीब नवाज़ के नाम पर यूनिवर्सिटी स्थापित की जाए, मुल्क की तमाम बड़ी यूनिवर्सिटीज में सूफी चेयर और तमाम स्कूल कॉलेजेस में सुफिया पर आधारित सिलेबस पढाया जाए !

उन्होंने देश में शांति अमन की अपील की और हुकूमत इ हिन्द से सुफिस्म के प्रोत्साहन की मांग की और वहां मूलभूत सुविधाएँ स्थापित की जाएँ

सूफी सेंटर  का कायम करने के लिए दिल्ली में इंटरनेशनल सूफी संतरे कायम किया जाए ! जिससे प्यार अमन मुहब्बत की बातें और इस कल्चर के फरोग का काम किया  जाए !

पीर साकिब शामी इंग्लैंड , ने कहा कि हमे नौजवानों को साफ़ बताना होगा कि सही इस्लाम सुन्नते रसूल में है और आपकी हकीकी ज़िन्दगी सुफिया के तबके में अगर देखना है तो ग़रीब नवाज़ और हज़रात निजामुद्दीन की ज़िन्दगी को देखो , सिर्फ किताब पढ़कर नहीं अमल करके देखिये,  उनको देख कर उनकी नक़ल करके यानी कुरान के मुताबिक सच्चो के साथ हो जाओ हिदायत पा जाओगे वरना झूठे किसी भी तरह आपको किताबो का अपने हिसाब से मतलब समझाते रहेगे !

इस वक़्त इस आन्दोलन को अहले सुन्नत के बड़े मुजदिद  इमाम अहमद रज़ा के नाम से जाना जाता है क्यूंकि उन्ही का नाम है जिससे इस्लाम की गलत तशरीह करने वाला समाज अपने को अलग करता है जिन्होंने तमाम सूफी वर्ग को लिखित तौर पर गुमराही से बचाने का आन्दोलन चलाया!

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