नई दिल्ली | मशहूर निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली को जिस फिल्म ‘पद्मावती’ के लिए थप्पड़ मारे गये है, वो असल में एक काल्पनिक पात्र है. पद्मावती , मालिक मोहम्मद जायसी के साहित्य ‘पद्मावत’ का एक काल्पनिक पात्र है. हालाँकि राजपूत करणी सेना , भंसाली पर पद्मावती के इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगा रहे है लेकिन इतिहासकार इससे सहमत नही है.

जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी के इतिहास के रिटायर प्रोफेसर हरबंस मुखिया का कहना है की पद्मावती केवल एक काल्पनिक पात्र है. असल जिन्दगी से इसका कोई लेना देना नही है. क्योकि दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी का शासनकाल 1296 से 1316 का है जबकि मालिक मोहम्मद जायसी की पद्मावत 1540 की रचना है. दोनों में करीब 250 साल का अन्तर है.

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मालिक मोहम्मद जायसी ने ‘पद्मावत’ में लिखा है की चित्तोडगढ के राजा रतनसेन की पत्नी पद्मावती बेहद ही खूबसूरत रानी थी. उसकी ख़ूबसूरती में दीवाना हो दिल्ली के शासक अलाउद्दीन खिलजी, किसी भी हाल में पद्मावती को पाना चाहता है. इसी वजह से वो चित्तोडगढ पर हमला कर उसे जीत लेता है. लेकिन पद्मावती अपनी इज्जत बचाने के लिए आत्महत्या कर लेती है. खिलजी , पद्मावती को फिर भी हासिल नहीं कर पाता.

हरबंस मुखिया ने आगे कहा की  संजय लीला भंसाली जायसी की ‘पद्मावत’ पर ही फिल्म बना रहे है. इतिहास में कही भी पद्मावती का जिक्र नही है तो इतिहास से खिलवाड़ करने का सवाल ही पैदा नही होता. इतिहास से खिलवाड़ , करणी जैसे दल करते है जिनको इतिहास की कोई जानकारी ही नही है. ये केवल राष्ट्रवाद के नाम पर हिंसा करना जानते है. हरबंस का तो यहाँ तक कहना है की इतिहास में अकबर की जोधा नाम की कोई पत्नी ही नही थी. यह भी मात्र काल्पिनक किरदार है.

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