तमिलनाडु में शहीद की विधवा की इस्लाम धर्म अपनाने की वजह से पेंशन के रुकने का मामला सामने आया है। आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के दखल के बाद फिर से विधवा की पेंशन शुरू हो पाई है।

जनसत्ता की खबर के अनुसार, पीडी सुनंथा के पूर्व पति सेना के जवान थे और एक हादसे में वह शहीद हो गए थे। पति की मौत के बाद सुनंथा ने दूसरी शादी कर ली और शादी के बाद धर्मांतरण कर इस्लाम अपना लिया। धर्मांतरण के बाद सुनंथा ने अपना नाम हलीमा रख लिया। लेकिन हलीमा के आईडी प्रूफ में उसका नाम सुनंथा और धर्म हिंदू ही रहा।

जब हलीमा अपने पूर्व पति की पेंशन लेने बैंक गई तो बैंक को नाम अलग-अलग होने के चलते आधार लिंक करने में दिक्कत आयी, जिसके बाद बैंक ने हलीमा को पेंशन देने से इंकार कर दिया। काफी दिनों तक परेशान होने के बाद हलीमा ने आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल से गुहार लगाई।

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इस पर आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल ने मामले में पीड़िता को राहत देते हुए स्थानीय रिकॉर्ड ऑफिस को हलीमा के आईडी प्रूफ में जरुरी बदलाव करने का आदेश दिया। जिसके बाद अब हलीमा के आईडी प्रूफ में बदलाव करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, कुछ साल पहले लांस नायक वीएस सिजु की एक हादसे में मौत हो गई थी। वीएस सिजु असम में ड्यूटी के दौरान पेट्रोलिंग कर रहे थे। तभी उनके वाहन का एक्सीडेंट हो गया और इस एक्सीडेंट में सिजु की जेब में रखा हैंड ग्रेनेड फट गया, जिससे वह गंभीर रुप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई।

सेना ने वीएस सिजु की मौत को युद्ध के दौरान हुआ नुकसान माना और सिजु के परिवार की पेंशन को मंजूरी दे दी। पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा सिजु की मां को और 50 प्रतिशत हिस्सा उनकी पत्नी को दिया जाने लगा। लेकिन सिजु की पत्नी सुनंथा द्वारा इस्लाम अपनाए जाने के कारण पहचान अलग-अलग होने पर यह परेशानी आयी।

हलीमा की वकील का कहना है कि रिकॉर्ड ऑफिस को आर्म्ड फोर्सेस का आदेश मिल गया है और उन्होंने हलीमा के आईडी प्रूफ में जरुरी बदलाव की प्रक्रिया शुरु कर दी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

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