Thursday, January 27, 2022

महंगाई के मोर्चे पर सरकार विफल – थोक मुद्रास्फीति पहुंची 2.59 प्रतिशत पर

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देश की आर्थिक वृद्धि की सुस्त पड़ती रफ्तार के बीच खुदरा के बाद थोक महंगाई दर में आए बड़े उछाल ने महंगाई के मोर्चे पर सरकार विफलता को सबके सामने लाकर रख दिया है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर, 2019 में बढ़कर 2.59 प्रतिशत पर पहुंच गई।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में खाद्य वस्तुओं के दाम 13.12 प्रतिशत बढ़े। एक महीने पहले यानी नवंबर में इनमें 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसी तरह गैर खाद्य उत्पादों के दाम चार गुना होकर 7.72 प्रतिशत पर पहुंच गए।

नवंबर में गैर खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 1.93 प्रतिशत थी. आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में माह के दौरान सब्जियां सबसे अधिक 69.69 प्रतिशत महंगी हुईं। इसकी मुख्य वजह प्याज है जिसकी मुद्रास्फीति माह के दौरान 455.83 प्रतिशत बढ़ी। इस दौरान आलू के दाम 44.97 प्रतिशत चढ़ गए।

इससे पहले सोमवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर में बढ़कर 7.35 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो इसका पांच साल का उच्चस्तर है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई बेकाबू होने से अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार को तेज करना और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

अर्थशास्त्री अरुण कुमार ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि महंगाई में असमान उछाल आने का सीधा असर आम लोगों की खपत पर होगा क्योंकि उनका घर का बजट बढ़ेगा। वह इसकी भरपाई खपत में कटौती कर करेंगे। इसके चलते बाजार में मांग और घटेगी जबकि सरकार अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज करने के लिए मांग बढ़ाने पर जोर दे रही है लेकिन, यह करना अब ज्यादा मुश्किल होगा क्योंकि महंगाई से आम लोगों की बचत कम होगी।

एसबीआई की शोध इकाई इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार, सब्जियों के दाम में वृद्धि को देखते हुए जनवरी माह के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई आठ फीसदी से ऊपर जा सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च तक खुदरा मुद्रास्फीति सात प्रतिशत से ऊपर बनी रह सकती है।

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