Sunday, October 24, 2021

 

 

 

एक माँ की उम्मीद – जहां भी है, लेकिन जिंदा है मेरा बेटा, अल्लाह मेरे नजीब को मुझे लौटाएंगे

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पिछले साल 15 अक्टूबर को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कैंपस से लापता हुए नजीब अहमद की गुमशुदगी को पूरा एक साल हो चूका है. लेकिन अब तक नजीब के बारें में कोई सुराग नहीं है. हालांकि उनकी वालिदा को नजीब के लौटने की पूरी उम्मीद हैं.

लगातार एक साल दर-दर बेटे के लिए भटक रही नफीस फातिमा का कहना है कि मुझे पता है कि वह जहां भी है, जिंदा है. अल्लाह मेरे नजीब को मेरे पास लौटाएंगे. उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से उनकी जिंदगी जहन्नुम बन चुकी है. दिल्ली पुलिस और सीबीआई नजीब के लापता होने की जांच कर रही हैं लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग पाने में नाकाम रही हैं.’

आप को बता दे कि बीते वर्ष 14-15 अक्टूबर की रात को जेएनयू परिसर में अपने अखिल विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने नजीब की कथित तौर पर पिटाई की थी. जिसके बाद से ही वह लापता है.

नजीब के छोटे भाई मुजीब का भी यही हाल है. एमटेक कर चुके मुजीब पीएचडी करना चाहते हैं. वह पीएचडी का फार्म भी डाल चुके थे. लेकिन वे अब पीएचडी के बजाय कोई नौकरी करना चाहते हैं ताकि घर का गुजारा कर सके. उन्होंने, बताया कि नजीब को तलाशने में उन्हें उनकी संपति तक बिक चुकी है.

ध्यान रहे दिल्ली हाई कोर्ट पुलिस से ये मामला सीबीआई को सौंप चुकी है. लेकिन अब तक कुछ भी पता नहीं लगा पाया है. हाई कोर्ट की  और से सीबीआई को कई बार फटकार भी लग चुकी है.

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