कहां चले गए 2000 के नोट? सरकार ने बताई मार्केट से नोट गायब होने की वजह

Close up of Indian 2000 rupee notes

मोदी सरकार ने 8 नवंबर 2016 को काले धन पर अंकुश लगाने के लिए उस समय 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का फैसला लिया था। जिसके बाद 2000 और 500 के नोट की एक नई श्रृंखला पेश की गई। नोटबंदी के बाद बाजार में प्रचलन में आए 2000 के नोटों को लेकर सरकार से सदन में सवाल किया गया।

 

आखिर कहां चले गए 2000 के नोट?

वित्त मंत्रालय के राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सवाल का जवाब देते हुए राज्यसभा में कहा कि वर्ष 2018-19 सन 2000 के नोटों की छपाई के लिए नया मांग पत्र नहीं रखा गया है। इसके प्रचलन से बाहर होने के पीछे यह एक बड़ा कारण है। उन्होंने कहा कि विशेष मूल्यवर्ग के बैंक नोटों की छपाई का निर्णय सरकार द्वारा रिजर्व बैंक के साथ परामर्श करके लिया जाता है।

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जिससे कि जनता को लेनदेन संबंधी मांग को सुविधाजनक बनाने का भी ध्यान रखा जाता है। उन्होंने आगे कहा कि जनता को जिन नोटों की आवश्यकता अधिक होती है उन नोटों के प्रचलन करने का फैसला पहले लिया जाता है।उन्होंने कहा कि 31 मार्च, 2018 को दो हजार के 336.3 करोड़ नोट (NIC) परिचालन में थे। जो मात्रा और मूल्य के मामले में NIC का क्रमशः 3.27 प्रतिशत और 37.26 प्रतिशत है। वहीं 26 नवंबर 2021 को 2,233 MPCS परिचालन में थे। जो मात्रा और मूल्य के संदर्भ में NIC का क्रमश: 1.75 प्रतिशत और 15.11 प्रतिशत है।

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