मुरदाबाद | पुराने जमाने में कुछ अच्छे राजा अपने प्रजा की तकलीफों को जानने के लिए भेष बदलकर उनके बीच जाते थे. इसका फायदा यह होता था की राजाओं को उनके अधिकारी बरगला नही पाते थे और राजा जनता की असल तकलीफों का हल ढूंढ पाता था. आजाद भारत में यह काम हमारे कुछ राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी करते है.

ऐसे ही एक अधिकारी है जुहैर बिन सगीर. ये मुरादाबाद के डीएम् है. गुरुवार की रात अचानक से एक आदमी सडको पर लोगो से बात करते हुए दिखाई दिया. वो कभी किसी चाय वाले की दूकान पर चाय पीता तो कभी गज्जक वाले से गज्जक खरीदता. इस दौरान यह आदमी चाय की चुस्किया लेते हुए लोगो से बात करते लगा. उनकी परेशानीयो की कोशिश करने लगा.

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तभी एक सर्राफ की दूकान चलाने वाले ने इस शख्स को पहचान लिया. यह शख्स और कोई नही बल्कि मुरादाबाद का डीएम् जुहैर बिन सगीर थे. जुहैर बिन बिना किसी को बताये अपने एक दोस्त की बाइक पर , काले शोल ओढ़े, रात के 9 बजे , मुरादाबाद की सडको पर निकल आते है. जुहैर आम आदमी की असल परेशानियों को जानना चाहते थे.

इसलिए जुहैर सीधे थाना गलशहीद के पास जिगर पार्क सामने पहुंचे जहाँ सर्द रात में रिक्शा चालक चाय पीते है. जुहैर ने यहाँ बैठकर कांच के गिलास में चाय पी और लोगो से उनके बारे में कुछ बाते की. करीब 40 मिनट लोगो से बात करने के बाद जुहैर पक्का बाग़ होते हुए, सीधी सराय पहुंचे. यहाँ भी उन्होंने ऐसे ही लोगो से बात की.

इसके बाद वो आलम बिरयानी वाले के पास सराय पुख्ता गए. यहाँ कला प्यादा मोड़ पर उन्होंने चाय की एक दूकान में एक बार फिर चाय पी और यही से संभली गेट से पीर गैब, लंबी गली, डाक्टर शमीम चौराहा पण दरीबा होते हुए वो रात 10:45 बजे मंडी चौक चौराहा पहुंचे. जब इन लोगो को पता चला की आपसे घर के सदस्य की तरह बात करने वाला शहर का डीएम् है तो लोगो उनकी तारीफ किये बिना नही रह सके.

एबीपी न्यूज़ के अनुसार इस दौरान एक पत्रकार ने उनसे बात. जुहैर बिन सगीर ने बताया की मैंने लोगो से उनकी समस्याओ और चुनाव के बारे में काफी बात की. इस दौरान लोगो ने अपनी असल समस्याओं से मुझे रूबरू कराया. जुहैर के इस कार्यक्रम के बारे में उनके स्टाफ के लोगो को भी नही पता था. बस उन्होंने अपने एक दोस्त को बुलाया और उसके साथ शोल ओढ़कर बाइक पर निकल पड़े.

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