नई दिल्ली | कहते है प्यार अँधा होता है. यह न धर्म देखता है और न जात पात. चाहे हमारा देश कितना भी अधुनिक हो चूका हो लेकिन हम आज भी एक मामले में बहुत पीछे है. इस देश में अंतर्जातीय विवाह आज भी निषेध ही माना जाता है. हमारा सामाजिक ताना बाना ही इस तरह बुना हुआ है की हम परिवार की इज्जत की खातिर कुछ भी कर गुजरने से गुरेज नही करते. इसलिए परिवार के लिए लड़का लड़की अंतर्जातीय विवाह के बारे में बहुत कम सोचते है.

देश में रोजाना ऑनर किलिंग के मामले सामने आते है जो अपने परिवार की झूठी इज्जत बचाने की खातिर किसी बेगुनाह की जान ले लेते है. लेकिन यह मामला तब और पेचीदा हो जाता है जब दोनों पक्षों के धर्म अलग हो जाए. अगर लड़का लड़की , हिन्दू-मुस्लिम हो तो यह मानकर चला जा सकता है की उनका प्यार अपनी मंजिल तक शायद ही पहुँच पायेगा. और अगर वो कामयाब हो भी गए तो भी उन दोनों का परिवार उनको स्वीकार नही करेगा.

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एक ऐसा ही मामले सामने आये है बरेली के रहने वाले राजीव और दिल्ली की रहने वाली काशिफा का. राजीव और काशिफा दिल्ली की एक मार्किट रिसर्च कंपनी में साथ काम करते थे. राजीव फील्ड से डाटा इकठ्ठा करके ले जाता था और काशिफा उस डाटा का विश्लेषण का काम करती थी. इस दौरान दोनों की दोस्ती हुई और फिर प्यार. लेकिन दोनों ने केवल दोस्त बने रहना है मुनासिब समझा.

लेकिन प्यार को कोई कितने दिन तक दबाकर रख सकता है. आखिर दोनों ने अपने घर पर एक दुसरे के बारे में बात की लेकिन दोनों ही तरफ से उन्हें ना ही मिली. आखिर 10 साल के लम्बे इन्तजार के बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया. धनक नाम के एनजीओ ने इस मामले में उनकी मदद की. कानून और संविधान के अनुसार दोनों की शादी सम्पान कराई गयी.

करीब तीन महीने बाद दोनों ने अपने परिवार को शादी के बारे में बताया. लेकिन दोनों ही तरफ से उनको स्वीकार नही किया गया. काशिफा पर पति को तलाक देने का दबाव बनाया गया तो राजीव के घरवालो ने भी उन्हें रिश्तेदारों की दुहाई दी. लेकिन काशिफा और राजीव फ़िलहाल अपनी जिन्दगी से खुश है. उन दोनों का कहना है की वो अपने बच्चे को सभी धर्मो की शिक्षा देंगे और 18 साल का होने के बाद उसको खुद का धर्म चुनने की भी आजादी देंगे.

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