देश भर में मुस्लिमों पर चिन्हित कर कभी गौरक्षा, तो कभी बीफ, आदि के नाम पर भगवा संगठनों द्वारा की जा रही हिंसा पर देश के पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा चिंता जाहिर करने पर बीजेपी खेमे में बवाल मचा हुआ है.

हालांकि अंसारी ने इस तरह का बयान पहली बार नहीं दिया है. 2015 में भी वे इस तरह का बयान दे चुके है. 31 अगस्त, 2015 को भी हामिद अंसारी ने उप राष्ट्रपति रहते हुए इसी तरह का बयान दिया था.

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ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिसे मुशावरत के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, “अभी हाल ही में सिंतबर, 2014 में सच्चर कमिटी की सिफारिशों को लागू करने के आदेशों के मूल्यांकन के लिए कुंडु रिपोर्ट जारी कर दी गई है. इसमें कहा गया है कि शुरूआत हो गई है लेकिन महत्वपूर्ण काम बाकी हैं. ये रिपोर्ट इन कमियों को दूर करने के लिए विशेष सिफारिशें करती हैं.”

इसके अलावा तत्कालीन उप राष्ट्रपति ने कहा था, “अल्पसंख्यक मुसलमानों का विकास सुरक्षा की भावना की बुनियाद पर किया जाना चाहिए. ”उन्होंने अपने भाषण में आगे कहा था, “मुसलमानों की स्थिति के बारे में अनेक राजनीतिक भ्रांतियां हैं. सामाजिक-आर्थिक रूप से उनकी स्थिति दर्शाती है कि वो राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक ताने बाने में हाशिए पर हैं और देश में उनकी स्थिति ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक पिछड़ी अनुसूचित जातियों और जनजातियों से भी खराब स्थिति में है.

उन्होंने कहा था, “मुस्लिम आबादी के बहुसंख्यक वर्ग को शिक्षा, आजीविका और लोक सेवाओं से जोड़कर राज्यों में रोजगार क्षेत्र में हुए घाटे का विस्तृत रूप से निरूपित किया जा सकता है. इसी क्रम में विभिन्नता सूचकांक और समान अवसर आयोग की स्थापना के लिए विशेषज्ञ दल ने 2008 में रिपोर्ट तैयार की है.

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