नई दिल्ली | स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया. लाल किले से मोदी का यह चौथा संबोधन था. 55 मिनट के अपने भाषण में मोदी ने लगभग हर पहलुओ पर सरकार का नजरिया स्पष्ट किया. चाहे कश्मीर का मसला हो या फिर तीन तलाक का. उन्होंने नोट बंदी और कालेधन पर सरकार द्वारा उठाये गए कदमो की जानकारी दी. इस दौरान उन्होंने नोट बंदी और कालेधन से सम्बंधित कुछ आंकड़े भी प्रस्तुत किये.

हालाँकि उम्मीद की जाती है की जब प्रधानमंत्री लाल किले से पुरे देश को संबोधित कर रहे है तब वह सही सही आंकड़े ही देश के सामने रख रहे होंगे. लेकिन फिर भी कुछ रिपोर्ट्स में मोदी द्वारा दिए गए आंकड़ो की जांच की गयी. द स्क्रॉल ने सभी आंकड़ो की जांच करने के बाद एक रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट के अनुसार मोदी ने नोट बंदी से सम्बंधित जो आंकड़े रखे वो अस्पष्ट है. उन आंकड़ो का क्या श्रोत है इसकी कोई जानकारी नही मिली है.

रिपोर्ट में बताया गया की मोदी ने नोट बंदी को सफल बताने की कोशिश में कुछ आंकड़े दिए. मोदी ने कहा विशेषज्ञों के अनुसार नोट बंदी से बैंकों में करीब 3 लाख करोड़ रूपए बैंकिंग सिस्टम में आये. जबकि करीब 1.75 लाख करोड़ रूपए की राशी शक के घेरे में है. मोदी ने यह भी बताया की 2 लाख करोड़ रूपए का कालाधन बैंकों में जमा हुआ. हालाँकि मोदी द्वारा दिए गए आंकड़ो के श्रोत के बारे में कुछ भी स्पष्ट नही है. लेकिन नोट बंदी के बाद से आरबीआई ने कोई भी आंकड़ा सार्वजानिक नही किया है.

द स्क्रॉल ने पीएम मोदी के इन दावों पर सवाल उठाते हुए पीटीआई की एक रिपोर्ट का हवाला दिया. पीटीआई ने इसी साल के शुरुआत में एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा था की नोट बंदी के बाद करीब 3 से 4 लाख करोड़ की अघोषित रकम सामने आई है. जबकि आरबीआई का अंदाजा था की बैंकों में अतिरिक्त जमा (अघोषित राशी नही) 2.7 लाख करोड़ से 4.3 लाख करोड़ रूपए हो सकता है. जबकि आरबीआई गवर्नर का कहना है की अभी तक पुराने नोटों की गिनती पूरी नही हुई है, इसलिए यह नही बताया जा सकता की बैंकों में कितनी रकम जमा हुई है.

मोदी ने यह भी दावा किया की हमने नोट बंदी के बाद डाटा माइनिंग करके 3 लाख फर्जी कंपनियों का पता लगाया है. जिनमे से करीब 1.75 लाख कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए है. द स्क्रॉल के अनुसार कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने इसी साल 12 जुलाई को लोक सभा में बताया था कि मंत्रालय ने 1.62,618 कंपनियों के रजिस्ट्रेशन कंपनीज एक्ट 2013 की धारा 248 के तहत रद्द कर दिए है. लेकिन इसके लिए मंत्रालय ने नोट बंदी के बाद की गई डाटा माइनिंग को वजह नही बताया था. इस रिपोर्ट में मोदी के आंकड़ो पर थोड़े सवाल जरुर खड़े होते है.

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