आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और उसके सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की कोशिश में जुटे भारत को अमेरिका से बड़ा झटका लगा है। हालांकि इसमे चीन इसमें अडंगा डाल रहा है। अमेरिका इस मामले में भारत का साथ तो दे रहा है। लेकिन उसने अब बड़ी मांग रख दी है।

वाशिंगटन ने नई दिल्ली को अवगत कराते हुए कहा है कि वह पुलवामा हमले के बाद से भारत के साथ आतंक के मुकाबले के लिए खड़ा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के आतंक नेटवर्क को बाधित करने की प्रतिबद्धता पर सहयोग की अपेक्षा करता है।

बता दें कि अमेरिका ने बीते साल दुनियाभर के देशों पर नवंबर में ईरान से तेल आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिका ने इसके लिए विभिन्न देशों को 6 माह का समय दिया था। जिसकी अवधि आगामी 1 मई को समाप्त हो रही है। भारत भी ईरान से बड़ी मात्रा में तेल का आयात करता है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने नई दिल्ली से ये भी कहा है कि ईरान से तेल आयात पर लगे प्रतिबंधों का चाबहार बंदरगाह के विकास पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस मामले पर भारत और अमेरिकी अधिकारियों के बीच विचार विमर्श चल रहा है। अमेरिका का कहना है कि उसकी योजना से ईरान पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा और ये भारत के खिलाफ नहीं है।

एक अंग्रेजी अखबार में छपे आंकड़ों के अनुसार, भारत ने साल 2018-19 में ईरान से 24 मिलियन टन तेल आयात किया। अब अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाने के बाद भारत को किसी अन्य तेल आपूर्तिकर्ता देश से इसकी भरपाई करनी होगी। सऊदी अरब और यूएई भारत को इस तेल की भरपाई करने के लिए तैयार भी हैं।

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