Thursday, January 27, 2022

SC ने माना इंटरनेट को मोलिक अधिकार, नीति आयोग के सदस्य बोले – गंदी फिल्म ही तो देखते हैं

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इंटरनेट पर रोक के सरकार के आदेशों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को अपने फैसले में कहा कि इंटरनेट संविधान के अनुच्छेद-19 के तहत लोगों का मौलिक अधिकार है। यानी यह जीने के हक जैसा ही जरूरी है। लेकिन अब नीति आयोग के सदस्य वीके सारस्वत ने इस पर विवादस्पद बयान दिया है।

सारस्वत ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बंद करने से अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है, क्योंकि वहां उसका इस्तेमाल केवल गंदी फिल्में देखने के लिए किया जाता है। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद पिछले 5 महीनों से जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सर्विस बंद कर दी गई थी।

सारस्वत गांधीनगर में धीरूभाई अंबानी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के वार्षिक समारोह में मीडियाकर्मियों ने उनसे सवाल किया कि जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट क्यों बंद है, जबकि इसे देश के विकास के लिए अहम माना जाता है?

इस पर सारस्वत ने कहा, “कश्मीर में इंटरनेट न होने से क्या फर्क पड़ता है? वहां इंटरनेट पर क्या देखा जाता है? वहां क्या ई-टेलिंग (पढ़ाई) हो रही है? गंदी फिल्में देखने के अलावा वहां इंटरनेट पर कुछ भी नहीं किया जाता है।”

हालांकि विवाद बढ्ने पर सफाई देते हुए कहा कि मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। अगर इस गलतफहमी ने कश्मीर के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं माफी मांगता हूं। कश्मीर के लोग यह नहीं समझे कि मैं कश्मिरियों को इंटरनेट सुविधा देने के खिलाफ हूं।

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