नई दिल्ली | बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लाल कृष्ण आडवानी , उमा भारती और मुरली मनोहर जोशी पर अपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने के, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, देश में राजनितिक सरगर्मिया तेज हो गयी है. इस मामले में ज्यादातर राजीनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. जहाँ बीजेपी ने सीबीआई पर सवाल उठाये है वही विपक्ष ने उमा भारती और आडवानी के इस्तीफे की मांग की है.

बीजेपी सांसद विनय कटियार ने सीबीआई पर सवाल उठाते हुए कहा की यह सीबीआई की बीजेपी नेताओ के खिलाफ साजिश है. मैं इस फैसले से सहमत नही हूँ और इसे सिरे से ख़ारिज करता हूँ. हम देखते है आगे क्या हो सकता है. यह राम मंदिर से जुड़ा हुआ मामला है इसलिए सीबीआई इसमें साजिश रच रही है. उमा भारती और लाल कृष्ण आडवानी के इस्तीफा देने के सवाल पर उन्होंने कहा की इसकी अभी जरुरत नही है.

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विनय कटियार ने आगे कहा की अभी सुप्रीम कोर्ट ने अपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. इसके बाद केस चलेगा, सुनवाई होगी और जब निर्णय आएगा तब देखा जायेगा. उधर कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कहा की अब लाल कृष्ण आडवानी और उमा भारती को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए.

कांग्रेस के दुसरे नेता शकील अहमद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा की यह एक महतवपूर्ण मामला था जो सुप्रीम कोर्ट के समक्ष था. इससे हजारो लोग प्रभावित हुए थे. न्याय के सामने दोषी बचेंगे नही. देश में कानून व्यवस्था है जिसको सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने और मजबूत किया है. उधर बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने उलटे मोदी सरकार पर ही सवाल उठाते हुए कहा की अगर वो राम मंदिर पर गंभीर है तो उन्हें बाबरी विध्वंस मामले में दाखिल चार्ज शीट को वापिस लेना चाहिए.

शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा की फ़िलहाल केंद्र में मोदी की हिदुत्वादी सरकार है. आडवाणी जी के नेतृत्व में अयोध्या का आन्दोलन चला था. तब बीजेपी के एजेंडा में राम मंदिर था. अब वो सरकार में है , केंद्र में भी और राज्य में भी . इसलिए अगर वो राम मंदिर बनाने के लिए गंभीर है तो उन्हें बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में दाखिल सभी चार्जशीट वापिस लेनी चाहिए क्योकि राम मंदिर तभी बनेगा जब बाबरी मस्जिद टूटेगी. यह तब बीजेपी का एजेंडा था लेकिन अब यह मोदी सरकार का एजेंडा होना चाहिए.

वही सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बात करे तो कोर्ट ने आदेश दिया है की इस मामले की सुनवाई दो साल में पूरी होनी चाहिए. इसके अलावा जो जज इस मामले की सुनवाई करेगा उस जज का ट्रान्सफर नही होगा. वही अलग अलग चल रहे दोनों मामलो को एक ही जगह पर चलाया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया की सभी आरोपियों के खिलाफ अपराधिक साजिश रचने का चार्ज 4 हफ्ते में फ्रेम होना चाहिए.

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