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लखनऊ के पासपोर्ट विवाद मामले मे  तन्वी सेठ और अनस सिद्दीकी को विदेश मंत्रालय ने क्लीन चीट देते हुए पासपोर्ट जारी कर दिये है। वहीं दूसरी और मामले मे आरोपी अधिकारी विकास मिश्रा दोषी बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विकास मिश्रा ने न केवल दायरे से बाहर जाकर पूछताछ की थी। बल्कि अंतरधार्मिक दंपति से धर्म के बारे में अप्रासंगिक सवाल भी पुछे थे। इसके अलावा पासपोर्ट जारी करने के लिए जरूरी सत्यापन प्रक्रिया के समय उनके आवास और अन्य अप्रासंगिक ब्यौरा जुटाने में उत्तरप्रदेश पुलिस ने भी गलती की।

बता दें कि तन्वी और अनस ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि उसने तन्वी को अपना नाम बदलने को कहा क्योंकि उन्होंने मुस्लिम व्यक्ति से शादी की है। साथ ही अनस को भी धर्मपरिवर्तन करने को कहा था।

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आंतरिक जांच में पाया गया कि तन्वी सेठ से पूछताछ करने वाले पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्र का मैरिज सर्टिफिकेट मांगना भी गलत था। नियमों के मुताबिक अन्य दस्तावेजों के सही पाए जाने पर पासपोर्ट के लिए इस सर्टिफिकेट की जरुरत नहीं पड़ती है।

इतना ही नहीं एक बार पुलिस सत्यापन के बाद पासपोर्ट जारी कर दिया जाता है और दोबारा सत्यापन की जरुरत सिर्फ आपराधिक रिकॉर्ड और नागरिकता संबंधी दिक्कतों के बाद ही होती है। इस मामले में दंपती के खिलाफ ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं था इसी वजह से पासपोर्ट के लिए दोबारा पुलिस सत्यापन की कोई जरुरत नहीं थी।