videocon telecommunication big

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जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सभी आरोपियों को बरी किये जाने के बाद टेलीकॉम कंपनी वीडियोकॉन टेलीकम्यूनिकेशंस ने सरकार से 10 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा वसूलने की तैयारी कर ली है.

बताया जा रहा है कि ‘वीडियोकॉन टेलीकम्यूनिकेशंस सरकार के खिलाफ कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा दायर करने की योजना बना रही है. कंपनी का कहना है कि दूरसंचार सेवा कारोबार के लिए उसे करीब 25 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेना पड़ा था. दूरसंचार लाइसेंस रद्द होने से उसे भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा.

ध्यान रहे उच्चतम न्यायालय ने 2012 के अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पहले आओ, पहले पाओ नीति को अपनाए जाने से न तो वीडियोकॉन को कोई लाभ हुआ और न ही वह लाइसेंस/स्पेक्ट्रम हासिल करने में किसी तरह की गड़बड़ी में लिप्त थी.

हालांकि सीबीआई ने 2011 में अदालत को बताया था कि वीडियोकॉन के खिलाफ गड़बड़ी करने, आपराधिक या किसी अन्य मामले का कोई साक्ष्य नहीं है. जिसके चलते सर्वोच्च न्यायालय ने 2 फरवरी, 2012 के अपने आदेश में वीडियोकॉन पर कोई जुर्माना भी नहीं लगाया.

2008 में पहली बार लाइसेंस प्राप्त करने वाली वीडियोकॉन ने नेटवर्क स्थापित करने पर 9,353 करोड़ रुपए खर्च किए थे. लेकिन 2012 के आदेश के बाद उसे कारोबार बंद करना पड़ा.

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