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रामलीला मैदान में रविवार को वीएचपी की धर्म संसद कहने को तो अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आयोजित की गई थी। लेकिन इसका दूसरा नजारा देखने को मिला। इस धर्म संसद में शामिल हुए लोग राम मंदिर निर्माण के लिए नहीं बल्कि दिल्ली की जामा मस्जिद तोड़ने के नारे लगा रहे थे।

2019 से पहले एक बार फिर भगवा संगठनों की और से मंदिर मस्जिद को लेकर राजनीति पर ज़ोर दिया जा रहा है। लेकिन अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर समर्थन न मिल पाने के कारण अब नए विवाद पैदा किए जा रहे है। जिनमे दिल्ली की एतिहासिक जामा मस्जिद को विवादित रूप में पेश करना है।

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बता दे कि दिल्ली में हुई धर्म संसद में देश के अलग-अलग जिलों से हजारों हिंदू युवा कार्यकर्ता पहुंचे थे। जो ‘एक धक्का और दो जामा मस्जिद तोड़ दो’ के नारे लगा रहे थे। ये नारा 6 दिसंबर 1992 को लगाए उस नारे से मिलता जुलता है। जिसमे एक उन्मादी भीड़ ने ‘एक धक्का और दो बाबरी मस्जिद तोड़ दो’ का नारा लगाते हुए बाबरी मस्जिद को तहस-नहस कर दिया था।

इस घटना के बाद पूरा मुल्क दंगो की आग मे झुलस गया था। साथ ही हिन्दू-मुस्लिमो के बीच जहरीली राजनीति का जो दौर शुरू हुआ वह आज भी जारी है और आने वाली नस्लों को भी अब इस जहरीली राजनीति में झोकने की साजिश की जा रही है। जिसका उदाहरण उपरोक्त विडियो में देखा जा सकता है।

बता दें कि बीते स्वतंत्रता दिवस पर बीजेपी नेता आई.पी. सिंह ने जामा मस्जिद पर जबरन तिरंगा लहराया था। साथ ही उन्होने मस्जिद का अनादर करते हुए मस्जिद के परिसर में जमकर नारेबाजी की थी। इस दौरान उन्होने मस्जिद में ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए थे।

इतना ही नहीं उन्होने ट्वीट किया था कि “71 साल बाद जामा मस्जिद दिल्ली की छाती पर चढ़कर हमने कार्यकर्ताओं के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया, वन्दे मातरम।”

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