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अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर की गई विश्व हिन्दू परिषद की धर्मसभा में कहा गया कि विवादित जमीन का बंटवारा किसी भी रूप में नहीं मंजूर होगा।

विहिप के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए राम जन्मभूमि की पूरी जमीन चाहिए इसमे एक इंच भी भूमि मस्जिद के लिए नहीं देंगे। चंपत राय ने सरकार को भी मंदिर निर्माण का वादा याद दिलाते हुए कहा कि जब संवैधानिक संस्थाएं टालमटोल रवैया अपनाएं तो विधायिका को आगे आना चाहिए।

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मुस्लिम समुदाय और वक्फ बोर्ड को धमकाते हुए उन्होने कहा कि वे लोग स्वेच्छा से मंदिर बनने का रास्ता साफ कर दें। अगर अध्यादेश की नौबत आयी तो फिर अयोध्या ही नहीं, काशी और मथुरा भी लेंगे। चंपत राय ने ज़ोर देकर कहा कि उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपना केस वापस लेना चाहिए।

babri masjid

उन्होंने कहा कि मस्जिद पक्षों का अदालत में रिकॉर्डेड कथन है कि यदि 1528 से पहले वहां मंदिर साबित हुआ तो वे दावा छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले में साबित हो गया है कि वहां मंदिर था। इसलिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को अपना दावा वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने भी वादा किया था कि मंदिर का दावा सिद्ध होते ही रामलला की जमीन मंदिर के लिए दे दी जाएगी। सरकार को भी अपना वादा पूरा करना चाहिए।

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय पर निशाना साधते हुए कहा कि अब हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा ना लें। 1950 से 2010 तक 60 साल इंतजार के बाद फैसला आया, उसके बाद भी कहा जाता है कि धैर्य रखो। उन्होंने कहा कि अब 2011 से सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है। लेकिन वहां भी टालमटोल रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम का मंदिर ही बनेगा लेकिन बाबर के नाम की मस्जिद कहीं नहीं बनेगी। उन्होंने कहा कि आगामी समय में कुछ लोग हिन्दू समाज को गुमराह करने की कोशिश भी करेंगे और खरीद फरोख्त भी करेंगे।

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