विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाने का विरोध शुरू कर दिया है। विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपतराय ने शनिवार को कहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले न्यास का का अध्यक्ष नहीं बनना चाहिए।

दरअसल, महंत परमहंस महाराज समेत कुछ साधु संत मंदिर निर्माण के कार्य को देखने के लिए प्रस्तावित न्यास का अध्यक्ष भागवत को बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि न्यास का गठन जनवरी 2020 तक हो सकता है।

महंत परमहंस महाराज ने कहा था कि इसके लिए वह (महंत परमहंस) अनशन पर भी बैठ सकते हैं। ऐसे में विहिप के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जब नागपुर दौरे पर पहुंचे तो पत्रकारों ने इससे जुड़ा सवाल कर दिया। जिसके जवाब में उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत को राम मंदिर ट्रस्ट का अध्यक्ष नहीं बनना चाहिए।

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वहीं विहिप के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने कहा, “संघ के शीर्ष पदाधिकारी किसी ट्रस्ट का खुद हिस्सा बनने में विश्वास नहीं रखते। संघ में ऐसी परंपरा भी नहीं रही है। संघ प्रमुख के सामने अगर कोई प्रस्ताव रखेगा भी तो वह इन्कार कर देंगे।”

मुस्लिम पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर चंपतराय ने कहा कि यह उनका कानूनी हक है। ऐसे कदमों से हम प्रभावित नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि अगर कोई टाइपिंग की गलती होगी या वाक्य विन्यास सही नहीं होगा या अदालत ने किसी दलील की व्याख्या नहीं की होगी, उस पर पुनर्विचार होगा। वह यह बात आम व्यक्ति के तौर पर कह रहे हैं। साथ ही उन्होंने मांग की सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए जमीन अयोध्या की नगर पालिका की सीमा से बाहर आवंटित की जाए।

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